Friday, 1 July 2016

कुंभ लग्न की विशेषताएँ |. नीलम..आइए अब कुंभ लग्न के बारे में बात करते है,

कुंभ लग्न की विशेषताएँ नीलम..आइए अब कुंभ लग्न के बारे में बात करते है, https://goo.gl/maps/N9irC7JL1Noar9Kt5।,,,,,,,,,,,Astrologer Gyanchand Bundiwal M. 0 8275555557 आपका व्यक्तित्व आकर्षक होता है और लोग आपकी ओर आकर्षित हो ही जाते हैं. आप जीवन में एक बार जो सिद्धांत बना लेते हैं फिर उन्हें बदलना कठिन ही होता है. आप सिद्धांतों पर चलने वाले व्यक्ति होते हैं.
आप अपने जीवनसाथी के प्रति निष्ठावान रहते हैं और पूर्ण रुप से उसके प्रति समर्पित रहते हैं. आपको समझना अन्य लोगो के लिए कठिन काम होता है क्योकि कुंभ का अर्थ घड़ा होता है, जब तक उसके भीतर तक ना झांका जाए तब तक पता ही नहीं चलता है कि कितना खाली है और कितना भरा हुआ है. इसलिए जो लोग आपके बेहद ही करीब होते हैं वही समझ सकते हैं.
कुंभ लग्न स्थिर लग्न होता है इसलिए आपके जीवन में भी स्थिरता बनी रहती है और आप अपने स्थायी निशान सभी जगह छोड़ते जाते हैं. आप हवा की तरह स्वतंत्र विचार वाले होते हैं, आप बहुत सी इच्छाओ को मन में पालकर रखते हैं. मानवतावादी विचारो वाले तथा मानव कल्याण चाहने वाले होते हैं. आप एक ईमानदार व्यक्ति भी होते हैं.
आपका लग्न वायु तत्व होने से आप सोचते बहुत हैं और गंभीर चिंतन में डूबे रहते हैं. स्वभाव से कुछ शर्मीले भी होते हैं और अपनी बातों को आसानी से किसी से बांटते भी नही हैं.
कुंभ लग्न के लिए शुभ रत्न
आइए अब आपको कुंभ लग्न के लिए शुभ ग्रहो के बारे में बताने का प्रयास करते हैं. इस लग्न के शनि लग्नेश होकर शुभ होता है. यदि शनि आपकी कुंडली में लग्नेश होकर कमजोर है तब आप नीलम धारण कर सकते है.
यदि आपको नीलम महंगा लगता है तब आप इसकी जगह नीली या लाजवर्त भी पहन सकते हैं. आपके लिए पन्ना व डायमंड भी उपयोगी रत्न है. पन्ना बुध के लिए और शुक्र के लिए डायमंड पहन सकते हैं. आप डायमंड की जगह इसका कोई भी उपरत्न ओपल या जर्कन भी पहन सकते हैं.
कुंभ लग्न के लिए शुभ ग्रह |
आइए अब आपको कुंभ लग्न के लिए शुभ ग्रहों के बारे में जानकारी देने का प्रयास करते हैं. कुंभ लग्न का स्वामी ग्रह शनि लग्नेश होकर शुभ होता है.
बुध पंचमेश होने से शुभ होता है हालांकि इसकी दूसरी राशि अष्टम भाव में पड़ती है. इसलिए बुध यदि कुंडली में निर्बल है तब शायद शुभ देने में असमर्थ हो सकता है और यदि बुध शुभ स्थिति में है तब यह पंचम भाव से संबंधित शुभ फल प्रदान करेगा.
शुक्र चतुर्थेश व नवमेश होकर योगकारी ग्रह बन जाते हैं. चतुर्थ भाव केन्द्र तो नवम भाव बली त्रिकोण भाव होता है और केन्द्र्/त्रिकोण का संबंध बनने पर ग्रह शुभ हो जाता है.
कुंभ लग्न के लिए अशुभ ग्रह |
आइए अंत में कुंभ लग्न के लिए अशुभ ग्रहों की बात करते हैं. कुंभ लग्न के लिए बृहस्पति शुभ नहीं माने जाते हैं. बृहस्पति मारक भाव तथा त्रिषडाय भाव के स्वामी होते हैं. कुंभ लग्न में कर्क राशि छठे भाव में पड़ती है और चंद्रमा इसके स्वामी होते हैं इसलिए चंद्रमा षष्ठेश होकर अशुभ हो जाते हैं.
इस लग्न के लिए सूर्य मारक भाव अर्थात सप्तम भाव के स्वामी बनते हैं हालांकि मारक का दोष लगता नहीं है. इस लग्न के लिए मंगल तीसरे व दशम भाव के स्वामी होते हैं. मंगल की गिनती भी शुभ ग्रहों में नहीं होती है.
कुंभ राशि का परिचय |
कुंभ राशि भचक्र की ग्यारहवें स्थान पर आने वाली राशि है. इस राशि का विस्तार 300 अंशो से 330 अंशो तक फैला हुआ है. इस राशि का स्वामी ग्रह शनि है. इस राशि की गणना वायु तत्व राशि में होती है. स्वभाव से इस राशि को स्थिर राशि में रखा गया है. इस राशि का प्रतीक चिन्ह एक व्यक्ति है जिसके कंधे पर घड़ा है. व्यक्ति ने नीचे धोती पहनी हुई है और ऊपर कुछ नही है. घड़े मे से पानी छलक व्यक्ति के ऊपर भी गिर रहा है.ज्योतिष और रत्न परामर्श 08275555557,,ज्ञानचंद बूंदीवाल,,,https://www.facebook.com/gemsforeveryone/?ref=bookmarks
शनि ॐ शं शनैश्चराय नम:।। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:।।
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नव रत्न ,,,सामान्य तौर पर ग्राहों-नक्षत्रों के अनुसार

नव रत्न ,,,सामान्य तौर पर ग्राहों-नक्षत्रों के अनुसार ज्योतिष में मात्र नवरत्नों को ही लिया जाता है।.https://goo.gl/maps/N9irC7JL1Noar9Kt5।,,,,,,,,,,,Astrologer Gyanchand Bundiwal M. 0 8275555557 इन रत्नों के उपलब्ध न होने पर इनके उपरत्न या समान प्रभावकारी रत्नों का प्रयोग किया जाता है। भारतीय मान्यता के अनुसार कुल 84 रत्न पाए जाते हैं, जिनमें माणिक्य, हीरा, मोती, नीलम, पन्ना, मूँगा, गोमेद, तथा वैदूर्य (लहसुनिया) को नवरत्न माना गया है। ये रत्न ही समस्त सौरमण्डल के प्रतिनिधि माने जाते हैं। यहीं कारण है कि इन्हें धारण करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
नवग्रह और रत्न ग्रहों के अनुसार रत्नों की अनुकूलता
ग्रह संबंधित रत्न धातु
सुर्य माणिक्य स्वर्ण
चंद्र मोती चाँदी
मंगल मूँगा स्वर्ण
बुध पन्ना स्वर्ण,काँसा
बृहस्पति पुखराज चाँदी
शुक्र हीरा चाँदी
शनि नीलम लोहा, सीसा
राहु गोमेद चाँदी, सोना, ताँबा, लोहा, काँसा
केतु लहसुनिया चाँदी, सोना, ताँबा, लोहा, काँसा
लग्न राशि और स्वामी ग्रह के अनुसार रत्नों की अनुकूलता
लग्न साशि स्वामी ग्रह अनुकूल
मेष मंगल मूँगा
वृषभ शुक्र हीरा
मिथुन बुध पन्ना
कर्क चंद्र मोती
सिंह सूर्य माणिक्य
कन्या बुध पन्ना
तुला शुक्र हीरा
वृश्चिक मंगल मूँगा
धनु गुरु पुखराज
मकर शनि नीलम
कुंभ शनि नीलम
मीन गुरु पुखराज

नव रत्न माणिक्य रत्न- माणिक्य सूर्य ग्रह का रत्न है। माणिक्य को अंग्रेज़ी में 'रूबी' कहते हैं। यह गुलाब की तरह गुलाबी सुर्ख श्याम वर्ण का एक बहुमूल्य रत्न है और यह काले रंग का भी पाया जाता है। इसे सूर्य-रत्न की संज्ञा दी गई है। अरबी में इसको 'लाल बादशाह ' कहते हैं। यह कुरुंदम समूह का रत्न है। गुलाबी रंग का माणिक्य श्रेष्ठ माना गया है।
पन्ना रत्न- पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। पन्ना को अंग्रेज़ी में 'एमेराल्ड' कहते हैं जो कई रंगों में पाया जाता है। यह हरा रंग लिए सफ़ेद लोचदार या नीम की पत्ती जैसे रंग का पारदर्शक होता है। नवरत्न में पन्ना भी होता है। हरे रंग का पन्ना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पन्ना अत्यंत नरम पत्थर होता है तथा अत्यंत मूल्यवान पत्थरों में से एक है। रंग, रूप, चमक, वजन, पारदर्शिता के अनुसार इसका मूल्य निर्धारित होता है।
हीरा रत्न- हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है। अंग्रेज़ी में हीरा को 'डायमंड' कहते हैं। हीरा एक प्रकार का बहुमूल्य रत्न है जो बहुत चमकदार और बहुत कठोर होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है, जैसे- सफ़ेद, पीला, गुलाबी, नीला, लाल, काला आदि। इसे नौ रत्नों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हीरा रत्न अत्यन्त महंगा व दिखने में सुन्दर होता है। सफ़ेद हीरा सर्वोत्तम है और हीरा सभी प्रकार के रत्नों में श्रेष्ठ है। हीरे को हीरे के कणों के द्वारा पॉलिश करके ख़ूबसूरत बनाया जाता है।
नीलम रत्न- नीलम शनि ग्रह का रत्न है। नीलम का अंग्रेज़ी नाम 'सैफायर' है। नीलम रत्न गहरे नीले और हल्के नीले रंग का होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है; मसलन- मोर की गर्दन जैसा, हल्का नीला, पीला आदि। मोर की गर्दन जैसे रंग वाला नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। नीलम पारदर्शी, चमकदार और लोचदार रत्न है। नवरत्न में नीलम भी होता है। शनि का रत्न नीलम एल्यूमीनियम और ऑक्सिजन के मेल से बनता है। इसे कुरुंदम समूह का रत्न माना जाता है।
मोती रत्न- मोती चन्द्र ग्रह का रत्न है। मोती को अंग्रेज़ी में 'पर्ल' कहते हैं। मोती सफ़ेद, काला, आसमानी, पीला, लाला आदि कई रंगों में पाया जाता है। मोती समुद्र से सीपों से प्राप्त किया जाता है। मोती एक बहुमूल्य रत्न जो समुद्र की सीपी में से निकलता है और छूटा, गोल तथा सफ़ेद होता है। मोती को उर्दू में मरवारीद और संस्कृत में मुक्ता कहते हैं।ज्योतिष और रत्न परामर्श 08275555557,,ज्ञानचंद बूंदीवाल,,,https://www.facebook.com/gemsforeveryone/?ref=bookmarks
लहसुनिया रत्न- लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है। लहसुनिया रत्न में बिल्लि की आँख की तरह का सूत होता है। इसमें पीलापन्, स्याही या सफ़ेदी रंग की झाईं भी होती है। लहसुनिया रत्न को वैदूर्य भी कहा जाता है।
मूँगारत्न- मूँगा मंगल ग्रह का रत्न है। मूँगा को अंग्रेज़ी में 'कोरल' कहा जाता है, जो आमतौर पर सिंदूरी लाल रंग का होता है। मूँगा लाल, सिंदूर वर्ण, गुलाबी, सफ़ेद और कृष्ण वर्ण में भी प्राप्य है। मूँगा का प्राप्ति स्थान समुद्र है। वास्तव में मूँगा एक किस्म की समुद्री जड़ है और मूँगा समुद्री जीवों के कठोर कंकालों से निर्मित एक प्रकार का निक्षेप है। मूँगा का दूसरा नाम प्रवाल भी है। इसे संस्कृत में विद्रुम और फ़ारसी में मरजां कहते हैं।
गोमेद रत्न- गोमेद राहु ग्रह का रत्न है। गोमेद का अंग्रेज़ी नाम 'जिरकॉन' है। सामान्यतः इसका रंग लाल धुएं के समान होता है। रक्त-श्याम और पीत आभायुक्त कत्थई रंग का गोमेद उत्त्म माना जाता है। नवरत्न में गोमेद भी होता है। गोमेद रत्न पारदर्शक होता है। गोमेद को संस्कृत में गोमेदक कहते हैं।
पुखराज रत्न- पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है। पुखराज को अंग्रेज़ी में 'टोपाज' कह जाता हैं। पुखराज एक मूल्यवान रत्न है। पुखराज रत्न सभी रत्नों का राजा है। यह अमूनन पीला, सफ़ेद, तथा नीले रंगों का होता है। वैसे कहावत है कि फूलों के जितने रंग होते हैं, पुखराज भी उतने ही रंग के पाए जाते हैं। पुखराज रत्न एल्युमिनियम और फ्लोरीन सहित सिलिकेट खनिज होता है। संस्कृत भाषा में पुखराज को पुष्पराग कहा जाता है। अमलतास के फूलों की तरह पीले रंग का पुखराज सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।


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सिंह लग्न का रत्न माणिक सिंह लग्‍न में रत्न माणिक्य रत्न


सिंह लग्न का रत्न माणिक सिंह लग्न में रत्न माणिक्य रत्न
माणिक्य रत्न सूर्य रत्न है और सूर्य को आत्मा कहा गया है. आईये माणिक्य रत्न किन व्यक्तियों को धारण करना चाहिए. और कौन से व्यक्ति इस रत्न को कदापि धारण न करें, इस विषय पर विचार करते है.
मेष लग्न-माणिक्य रत्न
मेष लग्न के लिये सूर्य पंचम भाव यानि त्रिकोण भाव का स्वामी है. और साथ ही ये लग्नेश मंगल के मित्र भी होते है. अत: मेष लग्न के व्यक्तियों के लिये माणिक्य रत्न धारण करना विधा क्षेत्र की बाधाओं को दूर करने में सहयोग करेगा. इसके रत्न के प्रभाव से मेष लग्न के व्यक्ति को बुद्धि कार्यो में रुचि बढती है. यह रत्न इन्हें आत्मोन्नति के लिये, संतान प्राप्ति के लिये, प्रसिद्धि, राज्यकृ्पा प्राप्ति के लिये मेष लग्न के व्यक्तियों को सदैव धारण करना चाहिए.
वृषभ लग्न के लिये माणिक्य रत्न
वृषभ लग्न के लिये सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी है. परन्तु यहां सूर्य लग्नेश शुक्र के मित्र न होकर, शत्रु है. वृषभ लग्न के व्यक्ति को माणिक्य रत्न केवल सूर्य महादशा में धारण करना चाहिए. वृ्षभ लग्न के लिये सूर्य रत्न माणिक्य महादशा अवधि में सुख-शान्ति, मातृ्सुख और भूमि सुख में वृ्द्धि करता है.
मिथुन लग्न के लिये माणिक्य रत्न .
इस लग्न के लिये सूर्य तीसरे घर के स्वामी है. इसलिये माणिक्य रत्न धारण करना मिथुन लग्न के व्यक्तियों के लिये कभी भी लाभकारी नहीं रहेगा.
कर्क लग्न के लिये माणिक्य रत्न
इस लग्न के व्यक्तिओं के लिए सूर्य दूसरे भाव यानि धन भाव का स्वामी है. साथ ही इस लग्न के लिये यह लग्नेश चन्द्र का मित्र भी है. अत: धन संचय करने के लिये माणिक्य रत्न धारण किया जा सकता है. परन्तु दूसरा भाव मारक भाव भी है. अर्थात कुछ शारीरिक कष्ट बढ सकते है. इसलिए वृ्षभ लग्न के लिये उतम रहेगा, मोती धारण करना इसकी तुलना में अधिक शुभ रहेगा.
सिंह लग्न के लिये माणिक्य रत्न
सिंह लग्न का स्वामी सूर्य स्वयं है. इस लग्न के व्यक्तियों को आजीवन रत्न धारण करना चाहिए. इससे शत्रु को परास्त करने में सफलता मिलेगी,शारीरिक व मानसिक स्वास्थय की वृ्द्धि होगी, आयु में वृ्द्धि होगी व यह रत्न मानसिक संतुलन बनाये रखने में भी सहायता करेगा.
कन्या लग्न के लिये माणिक्य रत्न
कन्या लग्न के व्यक्तियों को माणिक्य रत्न कभी भी धारण नहीं करना चाहिए. इस लग्न के लिये सूर्य 12 वें भाव के स्वामी होते है.
तुला लग्न के लिये माणिक्य रत्न
तुला लग्न के सूर्य आय भाव के स्वामी होते है. और लग्नेश शुक्र के शत्रु भी. इस कारण से इसे केवल सूर्य महादशा में धारण करना अनुकुल रहता है. अन्यथा पन्ना धारण करना तुला लग्न के इनके लिये विशेष शुभ रहता है.
वृश्चिक लग्न के लिये माणिक्य रत्न
इस लग्न के लिये सूर्य दशम भाव के स्वामी है. व लग्नेश मंगल के मित्र भी है. इसलिए इस लग्न के व्यक्तियों के लिये माणिक्य रत्न राज्यकृ्पा, मानप्रतिष्ठा तथा नौकरी, व्यवसाय में उन्नति देता है.
धनु लग्न के लिये माणिक्य रत्न
धनु लग्न में सूर्य नवम भाव यानि भाग्य भाव के स्वामी है. इसके अतिरिक्त ये लग्नेश गुरु के मित्र भी है. धनु लग्न के व्यक्तियों का माणिक्य रत्न धारण करना सर्वश्रेष्ठ शुभ फल देता है. इसे धारण करने से इन्हें जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति में सहायता मिलती है. भाग्य वृ्द्धि और पिता सुख में सहयोग मिलता है.
मकर लग्न के लिये माणिक्य रत्न
इस लग्न के लिये सूर्य अष्टम भाव के स्वामी है. लग्नेश शनि के शत्रु भी है. मकर लग्न के व्यक्ति माणिक्य रत्न कभी भी धारण न करें.
कुम्भ लग्न के लिये माणिक्य रत्न
कुम्भ लग्न के लिये सूर्य सप्तम भाव के स्वामी है. लग्नेश शनि से इनकी शत्रुता भी है. इसलिये जहां तक संभव हो इन्हें माणिक्य रत्न धारण करने से बचना चाहिए.
मीन लग्न के लिये माणिक्य रत्न
मीन लग्न के लिये सूर्य छठे भाव यानि रोग भाव के स्वामी है. लग्नेश गुरु के मित्र है. विशेष परिस्थितियों में भी केवल सूर्य महादशा में ही माणिक्य रत्न धारण करें. अन्यथा इसे धारण करना शुभ नहीं है.
माणिक्य रत्न के साथ क्या पहने
माणिक्य रत्न धारण करने वाला व्यक्ति इसके साथ में मोती, मूंगा और पुखराज या इन्हीं रत्नों के उपरत्न धारण कर सकता है.
माणिक्य रत्न के साथ क्या न पहने
माणिक्य रत्न के साथ कभी भी एक ही समय में हीरा, नीलम या पन्ना धारण नहीं करना चाहिए. इसके अतिरिक्त माणिक्य रत्न के साथ इन्ही रत्नों के उपरत्न धारण करना भी शुभ फलकारी नहीं रहता है.
ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि !तन्नो सूर्य प्रचोदयात !
ॐ अश्वाद्वाजय विद्महे पासहस्थाया धीमहि !तन्नो सूर्य प्रचोदयात !
सूर्य देव की शांति हेतु उपाय :
मंत्र जाप : ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः जप संख्या २८०००

मेष लग्न मूंगा 1: मेष लग्‍न में सूर्य पांचवें भाव का स्‍वामी होता है

मेष लग्न मूंगा 1: मेष लग् में सूर्य पांचवें भाव का स्वामी होता है और लग्नेश मंगल का मित्र होता है।   इस स्िति में बौद्धिक क्षमता में वृद्धि, संतान-सुख और राजकृपा प्राप् करने के लिए माणिक् पहन सकते हैं। यहां सूर्य की महादशा में भी माणिक धारण किया जाता है।कौन सा रत्न होगा शुभ

2: मेष लग् की कुंडली में चंद्रमा चौथे भाव का स्वामी होता है। चौथे भाव का स्वामी चंद्रमा मंगल का मित्र है अत: इस लग् के व्यक्ति मानसिक शांति, मातृ-सुख, गृह-भूमि और विद्या लाभ के लिए मोती धारण करना लाभकारी होता है। यहां चंद्रमा की महादशा में यह रत् पहनना लाभकारी होगा। यहां विशेष यह है कि यदि मोती मित्र मंगल के रत् मूंगे के साथ पहना जाए तो विशेष लाभकारी होगा।

3: मेष लग् में मंगल लग् का स्वामी होता है। अत: इस लग् के व्यक्ति को आजीवन मूंगा पहनना चाहिए। इस दशा में मूंगा आयुवृद्धि, स्वास्थ्-लाभ एवं मान-सम्मान के लिए पहनते हैं।

4: मेष लग् की कुंडली में बुद्ध दो अनिष् भावों अर्थात तृतीय और षष् भाव का स्वामी होता है। इसलिए इस लग् के व्यक्तियों को कभी भी पन्ना धारण नहीं करना चाहिए।

5: मेष लग् की कुंडली में गुरू नौवें और बारहवें भाव का स्वामी होता है और लग्नेश मंगल का मित्र होता है। इसलिए पुखराज पहनना लाभदायक होता है। अगर इसे मूंगे के साथ पहना जाए तो यह ज्यादा लाभदायक होता है। 6: मेष लग् में शुक्र दूसरे ओर सातवें भाव का स्वामी होता है, इस लिए यह इस लग् के जातकों के लिए प्रबल मारेकेश है। अत: उन्हें हीरा नहीं पहनना चाहिए।

7: मेष लग् की कुंडली में शनि दसवें और ग्यारवें भाव का स्वामी होता है। ये दोनों भाव शुभ है लेकिन इसके बाद भी ग्यारवें भाव का स्वामी शनि होने के कारण इसे मेष लग् के लिए शुभ नहीं माना जाता है। अत: यदि शनि मेष लग् में पहले, दूसरे, चौथे, पांचवे, नवे और दशवें भाव में हो तो शनि की महादशा में नीलम पहनना बहुत लाभप्रद होता है।

8, मेष: इस लग्न वाले जातकों का अनुकूल रत्न मूंगा है जिसको शुक्ल पक्ष में किसी मंगलवार को मंगल की होरा में निम्न मंत्र से जाग्रत कर सोने में अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिए। मंत्र- ऊँ भौं भौमाय नमः लाभ- मूंगा धारण करने से रक्त साफ होता है और रक्त, साहस और बल में वृद्धि होती है, महिलाओं के शीघ्र विवाह मंे सहयोग करता है, प्रेत बाधा से मुक्ति दिलाता है। बच्चों में नजर दोष दूर करता है। वृश्चिक लग्न वाले भी इसे धारण कर सकते हैं।

लग्न स्वामी : मंगल  लग्न तत्व: अग्नि   लग्न चिन्ह : मेढ़ा   लग्न स्वरुप: चर  लग्न स्वभाव: उग्र  लग्न उदय: पूर्व  लग्न प्रकृति: चित्त प्रकृति   जीवन रत्न: मूंगा  अराध्य: भगवन शिव,भैरों,हनुमान   लग्न  धातु: ताम्बा  अनुकूल रंग: लाल, क्रीम   लग्न जाति: क्षत्रिय  शुभ दिन: मंगलवार, रविवार   शुभ अंक: 9  जातक विशेषता: तेजस्वी  मित्र लग्न : तुला,धनु, मकर   शत्रु लग्न : वृश्चिक, कन्या  लग्न लिंग: पुरुष

9 भौमस्य मन्त्रः - शारदाटीकायाम् ऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा॥

10 मूंगा रत्न धारण करने से पहले इस बात का सबसे पहले ध्यान रखना चाहिए की  रत्न को उसी के नक्षत्र में धारण करना चाहिए जैसे की मंगल का मूंगा को

मंगल के नक्षत्र में जैसे की  मृगशिरा चित्रा धनिष्ठा में या मंगलवार या  मंगलपुष्य नक्षत्र धारण मंगल के होरे में धारण करना चाहिए इस बात ध्यान रखना चाहिए कि उस समय राहु काल ना हो

भौम अं अंङ्गारकाय नम: ।। हूं श्रीं भौमाय नम:।।मंगल : क्रां क्रीं क्रौं : भौमाय नम: अग्निमूर्धादिव: ककुत्पति: पृथिव्यअयम। अपा रेता सिजिन्नवति

हां हंस: खं : हूं श्रीं मंगलाय नम: क्रां क्रीं क्रौं : भौमाय नम:"

अं अंगारकाय नम भौं भौमाय नम:

  धरणीगर्भसंभूतं विद्युतकान्तिसमप्रभम कुमारं शक्तिहस्तं तं मंगलं प्रणमाम्यहम ।। क्षिति पुत्राय विदमहे लोहितांगाय धीमहि-तन्नो भौम: प्रचोदयात