अंक ज्योतिष- मूलांक 4 जिनका जन्म 4, 13, 22, 31 तारीख को हुआ है उनका मूलांक 4 है। इस मूलांक के व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व हर्षल ग्रह करता है। ये लोग निरंतर क्रियाशील रहते हैं। इनके जीवन में बार-बार उतार-चढ़ाव आता रहता है। ये लोग कभी बहुत संपन्न तो कभी बहुत विपन्न भी देखे गए हैं। धन का गमनागमन, उन्नति-पतन, यश-अपयश, जय-पराजय, हानि-लाभ, सौभाग्य-दुर्भाग्य इत्यादि इनके जीवन में आता-जाता रहता है। ये नवीनता के उपासक और प्राचीन रूढ़िवादिता के भंजक होते हैं। ये पूर्णरूप से सामाजिक होते हैं और उसका निर्वहन करते हैं।
विवेचना- स्वामी ग्रह- हर्षल।
शुभ समय- 21 जून
से 30 अगस्त। निर्बल
समय- अक्टूबर, नवम्बर,
दिसम्बर। शुभ तिथियां-
4, 13, 22, 31। सहायक तिथियां- 2, 11, 20, 29।
शुभ वर्ष- 4, 13, 22, 31, 40, 45, 58, 67। सहायक
वर्ष- 2, 11, 20, 29, 38, 47,
56, 65, 74। शुभ दिन-
रविवार, सोमवार, शनिवार। सर्वोत्तम
दिन- शनिवार। शुभ
रंग- धूप-छांव,
नीला, भूरा, चटक
रंग। रत्न- नीलम।
रोग- रक्तदोष, संक्रामक
रोग, पशु से
आघात। प्रभावित अंग-
पिंडलियां व श्वास
क्रिया। देव-गणपति।
व्रत- गणेश चतुर्थी।
दान- लाल पदार्थ
व खाद्यान्न। विवाह
संबंध- 15 जुलाई से 15 अगस्त,
15 मई से 14 जून
तथा 15 अक्टूबर से 18 नवम्बर
के मध्य जन्मे
जातक से। व्यवसाय-
शराब, स्प्रिट, तेल,
कैरोसिन, पारा, इत्र, रेल
विभाग, वायु सेना,
टेक्नीशियन, इंजीनियरिंग, रंगसाजी, छापे का
कार्य, टेलीफोन आपरेटर, पत्रकारिता,
शिल्प कार्य, विद्युत
कार्य, भाषण, उपदेशक, राज्यकर्मचारी,
ठेकेदारी। शुभ दिशा-
दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम।
अशुभ दिशा- उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व।
धातु- लौह।
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