मोती चंद्र रत्न लग्न अनुसार धारण
ज्योतिष के अनुसार हम कोई भी रत्न धारण करते हैं तो सर्वप्रथम लग्न व लग्नेश की स्थिति देखते हैं। जो भी रत्न धारण कर रहे हैं। उसके लग्न व लग्नेश के साथ कैसे संबंध है मित्र है अथवा शत्रु है? पत्रिका में लग्न व उसके स्वामी का विशेष स्थान है। यहां हम केवल लग्न के आधार पर ही चर्चा कर रहे हैं।
मेष लग्न इस
लग्न में चंद्र
चतुर्थ भाव का
स्वामी होता है
व लग्नेश मंगल
का मित्र है।
इसलिए ऐसे व्यक्ति
मोती धारण कर
मानसिक शांति भूमि भवन
आदि का लाभ
ले सकते हैं
इसमें भी यदि
चंद्र शुभ भाव
में हो तो
चंद्र की दशा
में अत्यधिक लाभ
लिया जा सकता
है साथ में
यदि मंगल का
रत्न मूंगा भी
धारण करें तो
और अधिक लाभ
होगा।
वृष इस लग्न
में चंद्र अशुभ
भाव अर्थात तृतीय
भाव का स्वामी
है अतः मोती
नहीं धारण करें
तो ही अच्छा
है।
मिथुन इस लग्न
में चंद्र धन
भाव का स्वामी
है जो कि
धनभाव के साथ
मारक भाव भी
है। हालांकि चंद्र
स्वयं कभी मारकेश
नहीं होता परंतु
लग्नेश का शत्रु
है अतः मोती
धारण नहीं करें
तो ही अच्छा
है। चंद्र यदि
9, 10 अथवा ग्यारहवें भाव में
बैठा हो अथवा
दूसरे भाव में
ही बैठा हो
अथवा चंद्र की
महादशा में मोती
धारण करने से
धन लाभ लिया
जा सकता है।
कर्क इस लग्न
का स्वामी स्वयं
चंद्र है अतः
इस लग्न वाले
जातक को मोती
आजीवन धारण करना
चाहिए। इस लग्न
के लिये मोती
सभी क्षेत्रों में
लाभ देता है
व्यक्ति का स्वास्थ्य
भी अच्छा रखता
है।
सिंह इस लग्न
में चंद्र द्वादश भाव भाव अर्थात बारहवें
भाव का स्वामी
है साथ ही
लग्नेश सूर्य का मित्र
भी है। यदि
चंद्र कर्क राशि
में ही बैठा
हो तो चंद्र
की महादशा में
मोती धारण किया
जा सकता है।
कन्या इस लग्न
में चंद्र एकादश
भाव का स्वामी
वह लग्नेश बुध
का शत्रु है
इसलिए चंद्र यदि
एकादश भाव से
6, 8 अथवा बारहवें भाव में
बैठा हो तो
मोती धारण कर
आर्थिक लाभ लिया
जा सकता है
चंद्र की महादशा
में भी मोती
पहन सकते हैं।
तुला इस लग्न
का स्वामी शुक्र
है चंद्र दशम
भाव का स्वामी
होकर लग्नेश का
शत्रु है इसलिए
मोती केवल चंद्र
की महादशा में
ही धारण कर
सकते हैं।
वृश्चिक इस लग्न
में चंद्र नवम
भाव अर्थात भाग्य
भाव का स्वामी
है। यह शुभ
भाव है चंद्र
भी शुभ ग्रह
है साथ ही
लग्नेश मंगल का
मित्र है। इसलिए
मोती धारण करने
से जातक का
भाग्य प्रबल होगा
साथ ही यदि
मूंगा भी धारण
करें तो अधिक
लाभ मिलेगा।
धनु इस लग्न
में चंद्रमा मारक
भाव अर्थात अष्टम
भाव का स्वामी
है इसलिए ऐसे
जातक मोती से
दूर ही रहे
तो अच्छा है।
मकर इस लग्न
में भी चंद्र
सप्तम भाव में
जो मारक भाव
भी है का
स्वामी है साथ
ही लग्नेश शनि
का शत्रु भी
है। इसलिए ऐसे
जातक मोती धारण
नहीं करें।
कुंभ इस लग्न
में भी चंद्र
की वही स्थिति
है जो मकर
लग्न में थी
इसमें चंद्र छठे
भाव का स्वामी
है जो रोग
व शत्रु का
भाव है। इस
लग्न का स्वामी
भी शनि ही
है। इसलिए इस
लग्न वाले मोती
धारण नहीं करें
तो बहुत ही
अच्छा है।
मीन इस लग्न में
चंद्र पंचम भाव
का स्वामी है
जो एक शुभ
भाव है लग्नेश
गुरु भी चंद्र
का मित्र है
इसलिए इस लग्न
के व्यक्ति को
मोती धारण करना
संतान सुख विद्या
लाभ के साथ
मान-सम्मान व
यश भी देता
है।
रत्न धारण विधि
चंद्र देव का
मुख्य रत्न मोती
है। उपरत्नों में
चंद्रमणि व सफेद
हकीक है। यदि
आप रत्न धारण
के इच्छुक हैं
तो 8 से 15 रत्ती
के मोती को
चांदी की अंगूठी
में जड़वाएं फिर
किसी भी शुक्ल
पक्ष के प्रथम
सोमवार को चंद्रोदय
होने के बाद
दूध में गंगा
जल शहद व
शक्कर मिलाकर उसमें
अंगूठी डाल दें
फिर 5 अगरबत्ती चंद्र
देव के नाम
पर जलाएं चंद्र
देव से प्रार्थना
करें कि हे
चंद्रदेव में आपका
आशीर्वाद पाने के
लिए आप का
प्रतिनिधि रत्न धारण
कर रहा हूं
मुझे आशीर्वाद प्रदान
करें तत्पश्चात अंगूठी
निकालकर ॐ सोम
सोमाय नमः अथवा
आगे लिखे हुए
किसी भी चंद्र
मंत्र का 11 बार
जप करते हुए
अंगूठी को अगरबत्ती
के ऊपर घूम
आएं तथा मंत्र
जाप के बाद
प्रतिष्ठित शिवलिंग पर स्पर्श
करके अनामिका उंगली
में धारण करें।
चन्द्र के अन्य
मंत्र ॐ श्रीमते
नमः ॐ
निशा कराय नमः
ॐ चंद्राय नमः ॐ
विश्वेशाय नमः
ॐ भक्तानामिष्टदायकाय नमः ॐ
ताराधीशाय नमः।
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णव सम्भवम ।नमामि शशिनं सोमं शंभोर्मुकुट भूषणं ।। ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।।ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:। ॐ भूर्भुव: स्व: अमृतांगाय विदमहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमो प्रचोदयात्।
मोती की प्रभाव
अवधि
मोती धारण करने
की तिथि से
4 दिन में प्रभाव
देना आरंभ करता
है तथा लगभग
2 वर्ष 1 माह व
27 दिन तक पूर्ण
प्रभाव देता है
फिर निष्क्रिय हो
जाता है। इसलिए
यदि आपकी आर्थिक
स्थिति अच्छी है तो
इस समय के
बाद आप मोती
बदल दें यदि
नहीं बदल सकते
हैं
जिन लोगों को क्रोध
जल्दी आता है
उन्हें मोती धारण
करने से लाभ
मिलता है। यह
मानसिक शांति प्रदान करने
के साथ ही
एकाग्रता बढ़ाने में भी
कारगर होता है।
मोती किसे धारण
करना चाहिए
जिस व्यक्ति का जन्म
कर्क लग्न अथवा
राशि में हुआ
है उन्हें मोती
धारण करने से
चन्द्रमा का शुभ
फल शीघ्रता से
प्राप्त होता है।
जिनकी कुण्डली में
चन्द्रमा भाग्य अथवा धन
भाव का स्वामी
है उन्हें भी
मोती धारण चाहिए।
ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं
कि पंच महारत्नों
में मोती भी
एक रत्न है
इसे पवित्रता पूर्वक
धारण करने पर
व्यक्ति की बुद्धि
स्थिर होती है।
व्यक्ति अपनी मेहनत
और लगन से
धन एवं मान-सम्मान अर्जित करता
है।
सूक्ष्म चिह्न को पहचानें
जिस मोती का
रंग चमकीला सफेद
हो और उसमें
लाल रंग के
ध्वज का सूक्ष्म
चिन्ह होता है
उसे धारण करने
से सरकारी मामलों
में व्यक्ति को
सफलता मिलती है।
सरकारी पक्ष से
इन्हें धन का
लाभ होता है।
गोल आकार का
मोती जिसके बीच
में हरे रंग
का कमल फूल
दिखता है। ऐसा
मोती धारण करने
वाले को सरकारी
क्षेत्र से मान-सम्मान एवं धन
का लाभ होता
रहता है।
संतान सुख देने
वाला मोती
ज्योतिषशास्त्र
के मुताबिक संतान
सुख की चाहत
रखने वाले व्यक्ति
को ऐसा मोती
धारण करना चाहिए
जिसके मध्य भाग
में आसमानी रंग
का अर्द्ध चंद्राकार
चिन्ह नजर आता
हो। मोती के
संदर्भ में ऐसी
मान्यता भी है
कि जो व्यक्ति
शुद्ध मोती धारण
करते हैं उन
पर देवी लक्ष्मी
की कृपा बनी
रहती है अर्थात
व्यक्ति धनवान होता है।
मोती का आकार
गोल हो तो
अति उत्तम होता
है। अगर गोल
मोती नहीं मिले
तो लम्बा मोती
धारण किया जा
सकता है।
असली मोती की
पहचान
मोती की पहचान
का सबसे आसान
तरीका है कि
मोती को चावल
के दानों पर
रगड़ें। मोती को
चावल के दानों
पर रगड़ने से
सच्चे मोती की
चमक बढ़ जाती
है जबकि कृत्रिम
तरीके से तैयार
मोती की चमक
कम हो जाती
है।
मोती धारण करने
का समय
शुक्ल पक्ष में
रोहिणी, हस्त अथवा
श्रवण नक्षत्र में
सोमवार प्रातः अथवा संध्या
के समय कनिष्ठा
में मोती धारण
करना शुभ रहता
है। पुरूषों को
4.25 से 9.25 रत्ती एवं महिलाओं
को 3.25 से 5.25 रत्ती का
मोती धारण करना
चाहिए। मोती के
साथ गोमेद धारण
नहीं चाहिए। मोती
और चांदी दोनों
ही चंन्द्रमा से
संबंध रखते हैं।
इसलिए मोती को
चांदी में ही
धारण करना शुभ
रहता है।
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