सिंह लग्न का रत्न माणिक सिंह लग्न में रत्न माणिक्य रत्न
माणिक्य रत्न सूर्य रत्न है और सूर्य को आत्मा कहा गया है. आईये माणिक्य रत्न किन व्यक्तियों को धारण करना चाहिए. और कौन से व्यक्ति इस रत्न को कदापि धारण न करें, इस विषय पर विचार करते है.
मेष लग्न-माणिक्य रत्न
मेष लग्न के लिये सूर्य पंचम भाव यानि त्रिकोण भाव का स्वामी है. और साथ ही ये लग्नेश मंगल के मित्र भी होते है. अत: मेष लग्न के व्यक्तियों के लिये माणिक्य रत्न धारण करना विधा क्षेत्र की बाधाओं को दूर करने में सहयोग करेगा. इसके रत्न के प्रभाव से मेष लग्न के व्यक्ति को बुद्धि कार्यो में रुचि बढती है. यह रत्न इन्हें आत्मोन्नति के लिये, संतान प्राप्ति के लिये, प्रसिद्धि, राज्यकृ्पा प्राप्ति के लिये मेष लग्न के व्यक्तियों को सदैव धारण करना चाहिए.
वृषभ लग्न के लिये माणिक्य रत्न
वृषभ लग्न के लिये सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी है. परन्तु यहां सूर्य लग्नेश शुक्र के मित्र न होकर, शत्रु है. वृषभ लग्न के व्यक्ति को माणिक्य रत्न केवल सूर्य महादशा में धारण करना चाहिए. वृ्षभ लग्न के लिये सूर्य रत्न माणिक्य महादशा अवधि में सुख-शान्ति, मातृ्सुख और भूमि सुख में वृ्द्धि करता है.
मिथुन लग्न के लिये माणिक्य रत्न .
इस लग्न के लिये सूर्य तीसरे घर के स्वामी है. इसलिये माणिक्य रत्न धारण करना मिथुन लग्न के व्यक्तियों के लिये कभी भी लाभकारी नहीं रहेगा.
कर्क लग्न के लिये माणिक्य रत्न
इस लग्न के व्यक्तिओं के लिए सूर्य दूसरे भाव यानि धन भाव का स्वामी है. साथ ही इस लग्न के लिये यह लग्नेश चन्द्र का मित्र भी है. अत: धन संचय करने के लिये माणिक्य रत्न धारण किया जा सकता है. परन्तु दूसरा भाव मारक भाव भी है. अर्थात कुछ शारीरिक कष्ट बढ सकते है. इसलिए वृ्षभ लग्न के लिये उतम रहेगा, मोती धारण करना इसकी तुलना में अधिक शुभ रहेगा.
सिंह लग्न के लिये माणिक्य रत्न
सिंह लग्न का स्वामी सूर्य स्वयं है. इस लग्न के व्यक्तियों को आजीवन रत्न धारण करना चाहिए. इससे शत्रु को परास्त करने में सफलता मिलेगी,शारीरिक व मानसिक स्वास्थय की वृ्द्धि होगी, आयु में वृ्द्धि होगी व यह रत्न मानसिक संतुलन बनाये रखने में भी सहायता करेगा.
कन्या लग्न के लिये माणिक्य रत्न
कन्या लग्न के व्यक्तियों को माणिक्य रत्न कभी भी धारण नहीं करना चाहिए. इस लग्न के लिये सूर्य 12 वें भाव के स्वामी होते है.
तुला लग्न के लिये माणिक्य रत्न
तुला लग्न के सूर्य आय भाव के स्वामी होते है. और लग्नेश शुक्र के शत्रु भी. इस कारण से इसे केवल सूर्य महादशा में धारण करना अनुकुल रहता है. अन्यथा पन्ना धारण करना तुला लग्न के इनके लिये विशेष शुभ रहता है.
वृश्चिक लग्न के लिये माणिक्य रत्न
इस लग्न के लिये सूर्य दशम भाव के स्वामी है. व लग्नेश मंगल के मित्र भी है. इसलिए इस लग्न के व्यक्तियों के लिये माणिक्य रत्न राज्यकृ्पा, मानप्रतिष्ठा तथा नौकरी, व्यवसाय में उन्नति देता है.
धनु लग्न के लिये माणिक्य रत्न
धनु लग्न में सूर्य नवम भाव यानि भाग्य भाव के स्वामी है. इसके अतिरिक्त ये लग्नेश गुरु के मित्र भी है. धनु लग्न के व्यक्तियों का माणिक्य रत्न धारण करना सर्वश्रेष्ठ शुभ फल देता है. इसे धारण करने से इन्हें जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति में सहायता मिलती है. भाग्य वृ्द्धि और पिता सुख में सहयोग मिलता है.
मकर लग्न के लिये माणिक्य रत्न
इस लग्न के लिये सूर्य अष्टम भाव के स्वामी है. लग्नेश शनि के शत्रु भी है. मकर लग्न के व्यक्ति माणिक्य रत्न कभी भी धारण न करें.
कुम्भ लग्न के लिये माणिक्य रत्न
कुम्भ लग्न के लिये सूर्य सप्तम भाव के स्वामी है. लग्नेश शनि से इनकी शत्रुता भी है. इसलिये जहां तक संभव हो इन्हें माणिक्य रत्न धारण करने से बचना चाहिए.
मीन लग्न के लिये माणिक्य रत्न
मीन लग्न के लिये सूर्य छठे भाव यानि रोग भाव के स्वामी है. लग्नेश गुरु के मित्र है. विशेष परिस्थितियों में भी केवल सूर्य महादशा में ही माणिक्य रत्न धारण करें. अन्यथा इसे धारण करना शुभ नहीं है.
माणिक्य रत्न के साथ क्या पहने
माणिक्य रत्न धारण करने वाला व्यक्ति इसके साथ में मोती, मूंगा और पुखराज या इन्हीं रत्नों के उपरत्न धारण कर सकता है.
माणिक्य रत्न के साथ क्या न पहने
माणिक्य रत्न के साथ कभी भी एक ही समय में हीरा, नीलम या पन्ना धारण नहीं करना चाहिए. इसके अतिरिक्त माणिक्य रत्न के साथ इन्ही रत्नों के उपरत्न धारण करना भी शुभ फलकारी नहीं रहता है.
ॐ भास्कराय विद्महे महातेजाय धीमहि !तन्नो सूर्य प्रचोदयात !
ॐ अश्वाद्वाजय विद्महे पासहस्थाया धीमहि !तन्नो सूर्य प्रचोदयात !
सूर्य देव की शांति हेतु उपाय :
मंत्र जाप : ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः जप संख्या २८०००
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