Thursday, 3 September 2020

कटैला जामुनिया

 

कटैला जामुनिया  शनि का रत्न है जो किन्यायऔरमानवताका ग्रह है। अत: इस रत् को पहनने से धन, सम्मान और मानसिक शांति मिलती है।

शनि ढइया, शनि साढ़े साती और शनि महादशा के समय में इसके गलत प्रभावों से बचाने के लिए नीलम के स्थान पर जामुनिया धारण किया जा सकता है।

कैटेला धारण करने से कार्य क्षेत्र में भी प्रगति होती है क्योंकि यह निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है जिससे प्राप् अवसरों का ज्यादा लाभ उठाया जा सकता है।

यह रत्न मेहनती बनाता है और ऐसा देखा गया है कि इसके धारण करने से व्यक्ति काम के प्रति ज्यादा डेडिकेटेड हो जाता है और अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझता है।

शनि से संबंधित अंगो जैसे घुटना, रीढ़ की हड्डी और कन्धे की तकलीफें भी कठेला पहनने से कम होती हैं।

नशे से मुक्ति पाने में या नशा या अन्य लत छोड़ने में मददगार होता है।

कैटेला एक हीलिंग उपरत्न भी है। यह ध्यान और एकाग्रता में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि करता है

यह बैंगनी, नीला और श्वेत आदि रंगों में पाया जाने वाला पारदर्शी, स्निग्ध, नरम और चमकदार रत्न है। मगर यह जितने गहरे बैंगनी रंग का होगा, वह उतना ही अच्छा होता है। इसकी खानें ब्राजील, अफ्रीका और भारत में हैं। यह रत्न अचानक होने वाली दुर्घटनाओं से बचाता है। किसी पर जादू-टोना, किया-कराया है, उसके लिए भी बहुत ही फायदेमंद होता है। आम तौर पर लोग कहते हैं कि पैसा हाथ में टिकता नहीं, आता बाद में और चला पहले जाता है। यह रत्न फाइनेंशियल स्टैबिलिटी के लिए बहुत काम का है। इस रत्न की एक और विशेषता है कि जो लोग ज्यादा शराब पीते हैं, अगर उनको कटहला धारण कराया जाए तो वे भी आहिस्ता-आहिस्ता शराब छोड़ देते हैं। दूसरी बुराइयों से भी आदमी धीरे-धीरे छुटकारा पा लेता है। जिन जातकों का जन्म 21 फरवरी से 20 मार्च के बीच होता है, वे भी अगर इसे धारण करें तो उनके लिए भी अच्छा है। मीन राशि वाले जातकों को तो कटहला तुरंत धारण करना चाहिए। अगर अविवाहित लड़कियां इसे धारण करें तो उन्हें बहुत संदर और प्यार करने वाले पति की प्राप्ति होती है। ग्रीक लोगों का विश्वास है कि इसे धारण करने वाले जातका का जीवन बहुत खुशहाल होता है और उनके मन में दूसरों के प्रति दया की भावना पैदा हो जाती है। जो लोग गलत आदतों का शिकार हो जाते हैं, उनके लिए भी यह रत्न रामबाण की तरह काम करता है। जो लोग चिकित्सक, वैज्ञानिक, गणितज्ञ और रिसर्च करने वाले विद्वान हैं उनके लिए भी यह बहुत मुफीद रत्न है। सरकारी कर्मचारी अगर अपनी पसंद की जगह पर ट्रांसफर करवाना चाहते हैं या प्रमोशन चाहते हैं तो उनके लिए भी यह रत्न बहुत मदद कर सकता है। जिन जातकों की जन्म तारीख 3, 4 और 8 है, उनको भी यह रत्न धारण करना चाहिए। कुंभ राशि वालों के लिए भी यह रत्न बहुत काम करता है। अगर कहा जाये कि यह रत्न गुणों की खान है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। वास्तव में यह बहुत चमत्कारी रत्न है।


मिथुन लग्न के जातक को कौन सा रत्न धारण करना चाहिए तो चलिए जानते हैं मिथुन लग्न के बारे में

 मिथुन लग्न के जातक को कौन सा रत्न धारण करना चाहिए तो चलिए जानते हैं मिथुन लग्न के बारे में

मिथुन लग्न में रत्न सूर्य तीसरे भाव का स्वामी होता है। अत: इस कुंडली में माणिक्य धारण करना कभी भी लाभकारी नहीं होगा।

2: मिथुन लग्न  में चंद्र दूसरे स्थान का स्वामी है जिसे धन भाव भी कहते हैं। चंद्र की महादशा में तो किसी भी लग्न का जातक मोती धारण कर सकता है लेकिन ऐसी स्थिति में यह बहुत आवश्यक नहीं है क्योंकि मिथुन लग्न के लिए चंद्रमा मार्केश है लेकिन इसके बाद भी यदि चंद्रमा दूसरे भाव का स्वामी होकर नौवें, दसवें या फिर ग्यारवें भाव में हो तो मोती पहना जा सकता है या दूसरे भाव में चंद्रमा कर्क राशि के साथ स्वराशि का होकर बैठा हो तो धन लाभ के लिए मोती धारण किया जा सकता है।
3: मिथुन लग्न  में मंगल छठें और ग्यारवें भाव का स्वामी होता है। लग्न स्वामी बुध और मंगल के बीच परम शत्रुता होने के कारण इस लग्न  के जातक को मूंगा धारण नहीं करना चाहिए। विशेषकर मंगल की महादशा में तो मूंगा पहनना बेहद हानिकारक होगा।
4: मिथुन लग्न में बुध चतुर्थभाव का स्वामी होता है। इस लग्न के व्यक्तियों को पन्ना अवश्य धारण करना चाहिए क्योंकि यह कष्ट और विपत्ति से बचने के लिए उनकी सहायता करता है। बुध की महादशा में इस लग्न के लिए पन्ना विशेष लाभकारी होगा।
5: मिथुन लग्न में बृहस्पति सातवें और दशवें भाव का स्वामी होता है। इस कारण यह केद्रपति दोष से दूषित होता है। इसके बाद भी अगर गुरू लग्न, दूसरे, ग्यारवें या किसी केंद्र भाव में हो तो उसकी महादशा में पुखराज का पहना जा सकता है। इससे धन और संतान-सुख प्राप्त होगा। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि मिथुन लग्न में गुरू प्रबल मारकेश है अत: धन व सांसारिक सुख देने के बाद भी यह मारक बन जाता है। इसलिए यदि बहुत आवश्यक न हो मिथुन लग्न में पुखराज न धारण करें।
6: मिथुन लग्न में शुक्र पांचवें और बारहवें भाव का स्वामी है। पांचवें भाव में शुक्र की मूल राशि होती है अत: इस लग्न के लिए शुक्र शुभ माना गया हे। लेकिन मिथुन लग्न के स्वामी बुध और शुक्र में मित्रता होती है इसलिए सिर्फ मिथुन लग्न वालों को सुख, बुद्धि, बल, यश-कीर्ति, मान-सम्मान तथा भाग्योदय के लिए सिर्फ शुक्र की महादशा में ही हीरा पहनना चाहिए। इतना ही नहीं यदि हीरे को पन्ने के साथ धारण करेंगे तो असाधारण फल प्राप्त होंगे।
7: मिथुन लग्न में शनि आठवें और नौवें भाव का स्वामी होता है। नौवें भाव का स्वामी होने से शनि इस राशि के लिए शुभ ग्रह है। इसलिए पन्ना पहना जा सकता है। यदि शनि की महादशा में मिथुल लग्न वाले नीलम धारण करें तो अच्छे फल मिलेंगे। पन्ने के साथ नीलम पहनने पर इस लग्न के जातक असाधारण फल प्राप्त कर सकते हैं।
इस लगन के लिए ९ ग्रहों का फलादेश
सूर्य- भ्राता, बहना, भुजबल, तेज़, साहस, और शक्ति के गुण ।
चन्द्र- पैसा, परिवार, मनोबल और घिराव ।
मंगल- आय, बीमारी, दुश्मन और मेहनत आदि ।
बुध- देह का स्वरूप, आत्मा का बल, माता, जमीं जायदाद आदि
गुरु- पति या पत्नी, जीविका का साधन , राजधर्म, कारोबार, मान सन्मान, और दिल की मजबूती ।
शुक्र- पढ़ाई, बोलचाल, बच्चे और निपुणता ।
शनि- उम्र, डर, भाग्य और धर्म ।
राहु- छुपी हुई चालाकी, चिता, ज्यादा लाभ प्रप्ति।
केतु- कष्ट और अप्राप्य वस्तुओं की प्राप्ति आदि ।
इस लगन का बुध यदि मार्गी हो तब पन्ना धारण करने से लाभ मिलता है अगर बुध वक्री है तब पन्ना धारण नहीं करना चाहिए ।

पन्ना रत्न धारण करने से पहले इस बात का सबसे पहले ध्यान रखना चाहिए की रत्न को उसी के नक्षत्र में धारण करना चाहिए । जैसे की पन्ना को बुध के नक्षत्र में जैसे की आश्लेषा ज्येष्ठा रेवती में या बुधवार या बुधपुष्य नक्षत्र धारण बुध के होरे में धारण करना चाहिए इस बात ध्यान रखना चाहिए कि उस समय राहु काल ना हो 

बुध मंत्र ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते सं सृजेधामयं च।
अस्मिन्त्सधस्‍थे अध्‍युत्तरस्मिन् विश्वे देवा यशमानश्च सीदत।।
जप समय  मध्याह्न काल
बुध स्तुति जय शशिनन्दन बुध महाराजा। करहु सकल जन कहं शुभ काजा।।
दीजै बुद्धि सुमति बल ज्ञाना। कठिन कष्ट हरि हरि कल्याना।।
हे तारासुत रोहिणि नन्दन। चन्द्र सुवन दुःख दूरि निकन्दन।।
पूजहू आसदास कहं स्वामी। प्रणत पाल प्रभु नमो नमामी।।

बुध ग्रह का मंत्र ॐ नमो अर्हते भगवते श्रीमते मल्लि तीर्थंकराय कुबेरयक्ष |
अपराजिता यक्षी सहिताय ॐ आं क्रों ह्रीं ह्र: बुधमहाग्रह मम दुष्टग्रह,
रोग कष्ट निवारणं सर्व शान्तिं च कुरू कुरू हूं फट् || 14000 जाप्य ||
मध्यम यंत्र -ॐ ह्रौं क्रौं आं श्रीं बुधग्रहारिष्ट निवारक श्री विमल अनन्तधर्म शान्ति कुन्थअरहनमिवर्धमान अष्टजिनेन्द्रेभ्यो नम: शान्तिं कुरू कुरू स्वाहा || 8000 जाप्य ||
लघु मंत्र- ॐ ह्रीं णमो उवज्झायाणां || 10000 जाप्य ||
तान्त्रिक मंत्र- ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम: || 9000 जाप्य |

Tuesday, 22 January 2019

१ मुखी से २१ मुखी रुद्राक्ष,,,,1 Mukhi to 21 Mukhi Rudraksh

१ मुखी से २१ मुखी रुद्राक्ष,,,,1 Mukhi to 21 Mukhi Rudraksh
रुद्राक्ष देवता मंत्र १ मुखी शिव 1-ॐ नमः शिवाय । 2 –ॐ ह्रीं नमः
२ मुखी अर्धनारीश्वर ॐ नमः
३ मुखी अग्निदेव ॐ क्लीं नमः
४ मुखी ब्रह्मा,सरस्वती ॐ ह्रीं नमः
५ मुखी कालाग्नि रुद्र ॐ ह्रीं नमः
६ मुखी कार्तिकेय, इन्द्र,इंद्राणी ॐ ह्रीं हुं नमः
७ मुखी नागराज अनंत,सप्तर्षि,सप्तमातृकाएँ ॐ हुं नमः
८ मुखी भैरव,अष्ट विनायक ॐ हुं नमः
९ मुखी माँ दुर्गा १-ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः २-ॐ ह्रीं हुं नमः
१० मुखी विष्णु १-ॐ नमो भवाते वासुदेवाय २-ॐ ह्रीं नमः
११ मुखी एकादश रुद्र १-ॐ तत्पुरुषाय विदमहे महादेवय धीमही तन्नो रुद्रः प्रचोदयात २-ॐ ह्रीं हुं नमः
१२ मुखी सूर्य १-ॐ ह्रीम् घृणिः सूर्यआदित्यः श्रीं २-ॐ क्रौं क्ष्रौं रौं नमः
१३ मुखी कार्तिकेय, इंद्र १-ऐं हुं क्षुं क्लीं कुमाराय नमः २-ॐ ह्रीं नमः
१४ मुखी शिव,हनुमान,आज्ञा चक्र ॐ नमः
१५ मुखी पशुपति ॐ पशुपत्यै नमः
१६ मुखी महामृत्युंजय ,महाकाल ॐ ह्रौं जूं सः त्र्यंबकम् यजमहे सुगंधिम् पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनान् मृत्योर्मुक्षीय सः जूं ह्रौं ॐ
१७ मुखी विश्वकर्मा ,माँ कात्यायनी ॐ विश्वकर्मणे नमः
१८ मुखी माँ पार्वती ॐ नमो भगवाते नारायणाय
१९ मुखी नारायण ॐ नमो भवाते वासुदेवाय
२० मुखी ब्रह्मा ॐ सच्चिदेकं ब्रह्म
२१ मुखी कुबेर ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्य समृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा
आपकी ग्रह-राशि-नक्षत्र के अनुसार रुद्राक्ष धारण करें
ग्रह राषि नक्षत्र लाभकारी रुद्राक्ष मंगल मेष मृगषिरा-चित्रा-धनिष्ठा ३ मुखी
शुक्र वृषभ भरणी-पूर्वाफाल्गुनी-पूर्वाषाढ़ा ६ मुखी,१३ मुखी,१५ मुखी
बुध मिथुन आष्लेषा-ज्येष्ठा-रेवती ४ मुखी
चन्द्र कर्क रोहिणी-हस्त-श्रवण २ मुखी, गौरी-शंकर रुद्राक्ष
सूर्य सिंह कृत्तिका-उत्तराफाल्गुनी-उत्तराषाढ़ा1 मुखी, १२ मुखी
बुध कन्या आष्लेषा-ज्येष्ठा-रेवती ४ मुखी
शुक्र तुला भरणी-पूर्वाफाल्गुनी-पूर्वाषाढ़ा ६ मुखी,१३ मुखी,१५ मुखी
मंगल वृष्चिक मृगषिरा-चित्रा-धनिष्ठा ३ मुखी
गुरु धनु-मीन पुनर्वसु-विषाखा-पूर्वाभाद्रपद ५ मुखी
शनि मकर-कुंभ पुष्य-अनुराधा-उत्तराभाद्रपद ७ मुखी, १४ मुखी
शनि मकर-कुंभ पुष्य-अनुराधा-उत्तराभाद्रपद ७ मुखी, १४ मुखी
गुरु धनु-मीन पुनर्वसु-विषाखा-पूर्वाभाद्रपद ५ मुखी
राहु - आर्द्रा-स्वाति-षतभिषा८ मुखी, १८ मुखी
केतु - अष्विनी-मघा-मूल ९ मुखी,१७ मुखी
नवग्रह दोष निवारणार्थ १० मुखी, २१ मुखी
विषेष : १० मुखी और ११ मुखी किसी एक ग्रह का प्रतिनिधित्व नहीं करते।बल्कि नवग्रहों के दोष निवारणार्थ प्रयोग मे लाय जाते हैं ।
जन्म लग्न के अनुसार रुद्राक्ष धारण
भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रत्न धरण करने के लिए जन्म लग्न का उपयोग सर्वाधिक प्रचलित है । रत्न प्रकृति का एक अनुपम उपहार है। आदि काल से ग्रह दोषों तथा अन्य समस्याओं से मुक्ति हेतु रत्न धारण करने की परंपरा है।आपकी कुंडली के अनुरूप सही और दोषमुक्त रत्न धारण करना फलदायी होता है। अन्यथा उपयोग करने पर यह नुकसानदेह भी हो सकता है। वर्तमान समय में शुद्ध एवं दोषमुक्त रत्न बहुत कीमती हो गए हैं, जिससे वे जनसाधारण की पहुंच के बाहर हो गए हैं। अतः विकल्प के रूप में रुद्राक्ष धारण एक सरल एवं सस्ता उपाय है। साथ ही रुद्राक्ष धारण से कोई नुकसान भी नहीं है, बल्कि यह किसी न किसी रूप में जातक को लाभ ही प्रदान करता है। क्योंकि रुद्राक्ष पर ग्रहों के साथ साथ देवताओं का वास माना जाता है। कुंडली में त्रिकोण अर्थात लग्न, पंचम एवं नवम भाव सर्वाधिक बलशाली माना गया है। लग्न अर्थात जीवन, आयुष्य एवं आरोग्य, पंचम अर्थात बल, बुद्धि, विद्या एवं प्रसिद्धि, नवम अर्थात भाग्य एवं धर्म। अतः लग्न के अनुसार कुंडली के त्रिकोण भाव के स्वामी ग्रह कभी अशुभ फल नहीं देते, अशुभ स्थान पर रहने पर भी मदद ही करते हैं । इसलिए इनके रुद्राक्ष धारण करना सर्वाधिक शुभ है। इस संदर्भ में एक संक्षिप्त विवरण यहां तालिका में प्रस्तुत है।हमने कई बार देखा है कि कुंडली में शुभ-योग मौजूद होने के बावजूद उन योगों से संबंधित ग्रहों के रत्न धारण करना लग्नानुसार अशुभ होता है। उदाहरण के रूप में मकर लग्न में सूर्य अष्टमेश हो, तो अशुभ और चंद्र सप्तमेश हो, तो मारक होता है। मंगल चतुर्थेष-एकादषेष होने पर भी लग्नेष शनि का शत्रु होने के कारण अशुभ नहीं होता। गुरु तृतीयेश-व्ययेश होने के कारण अत्यंत अशुभ होता है। ऐसे में मकर लग्न के जातकों के लिए माणिक्य, मोती, मूंगा और पुखराज धारण करना अशुभ है। परंतु यदि मकर लग्न की कुंडली में बुधादित्य ,गजकेसरी, लक्ष्मी जैसा शुभ योग हो और वह सूर्य, चंद्र, मंगल या गुरु से संबंधित हो, तो इन योगों के शुभाशुभ प्रभाव में वृद्धि हेतु इन ग्रहों से संबंधित रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, अर्थात गजकेसरी योग के लिए दो और पांच मुखी, लक्ष्मी योग के लिए दो और तीन मुखी और बुधादित्य योग के लिए चार और एक मुखी रुद्राक्ष।रुद्राक्ष ग्रहों के शुभफल सदैव देते हैं परंतु अशुभफल नहीं देते।
रत्न परामर्श 08275555557,,ज्ञानचंद बूंदीवाल,,,https://www.facebook.com/gemsforeveryone/?ref=bookmarks
लग्न त्रिकोणाधिपति ग्रह लाभकारी रुद्राक्ष
मेष मंगल-सूर्य-गुरु ३ मुखी + 1 या १२ मुखी + ५ मुखी
वृषश् शुक्र-बुध-षनि ६ या १३ मुखी + ४ मुखी + ७ या १४ मुखी
मिथुन बुध-षुक्र-षनि ४ मुखी + ६ या १३ मुखी + ७ या १४ मुखी
कर्क चंद्र-मंगल-गुरु २ मुखी + ३ मुखी + ५ मुखी
सिंह सूर्य-गुरु-मंगल 1 या १२ मुखी + ५ मुखी + ६ मुखी
कन्या बुध-षनि-षुक्र ४ मुखी + ७ या १४ मुखी + ६ या १३ मुखी
तुला शुक्र-षनि-बुध ६ या १३ मुखी + ७ या १४ मुखी + ४ मुखी
वृष्चिक मंगल-गुरु-चंद्र ३ मुखी + ५ मुखी + २ मुखी
धनु गुरु-मंगल-सिंह ५ मुखी + ३ मुखी + 1 या १२ मुखी
मकर शनि-षुक्र-बुध ७ या १४ मुखी + ६ या १३ मुखी + ४ मुखी
कुंभ शनि-बुध-षुक्र ७ या १४ मुखी + ४ मुखी + ६ या १३ मुखी
मीन गुरु-चंद्र-मंगल ५ मुखी + २ मुखी + ३ मुखी

अंकषास्त्र के अनुसार रुद्राक्ष-धारण
जिन जातकों जन्म लग्न, राशि, नक्षत्र नहीं मालूम है वे अंक ज्योतिष के अनुसार जातक को अपने मूलांक, भाग्यांक और नामांक के अनुरूप रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं। 1 से ९ तक के अंक मूलांक होते हैं। प्रत्येक अंक किसी ग्रह विशेष का प्रतिनिधित्व करता है, जैसे अंक 1 सूर्य, २ चंद्र, ३ गुरु, ४ राहु, ५ बुध, ६ शुक्र, ७ केतु, ८ शनि और ९ मंगल का। अतः जातक को मूलांक, भाग्यांक और नामांक से संबंधित ग्रह के रुद्राक्ष धारण करने चाहिए।
आप अपने कार्य-क्षेत्र के अनुसार भी रुद्राक्ष धारण का सकते हैं
कुछ लोगों के पास जन्म कुंडली इत्यादि की जानकारी नहीं होती वे लोग अपने कार्यक्षेत्र के अनुसार भी रुद्राक्ष का लाभ उठा सकते हैं । कार्य की प्रकृति के अनुरूप रुद्राक्ष-धारण करना कैरियर के सर्वांगीण विकास हेतु शुभ एवं फलदायी होता है। किस कार्य क्षेत्र के लिए कौन सा रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, इसका एक संक्षिप्त विवरण यहां प्रस्तुत है।

नेता-मंत्री-विधायक सांसदों के लिए - 1 और १४ मुखी।
प्रशासनिक अधिकारियों के लिए - 1 और १४ मुखी।
जज एवं न्यायाधीशों के लिए - २ और १४ मुखी।
वकील के लिए - ४, ६ और १३ मुखी।
बैंक मैनेजर के लिए - ११ और १३ मुखी।
बैंक में कार्यरत कर्मचारियों के लिए - ४ और ११ मुखी।
चार्टर्ड एकाउन्टेंट एवं कंपनी सेक्रेटरी के लिए - ४, ६, ८ और १२ मुखी।
एकाउन्टेंट एवं खाता-बही का कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए - ४ और १२ मुखी।
पुलिस अधिकारी के लिए - ९ और १३ मुखी।
पुलिस/मिलिट्री सेवा में काम करने वालों के लिए - ४ और ९ मुखी।
डॉक्टर एवं वैद्य के लिए - १, ७, ८ और ११ मुखी।
फिजीशियन (डॉक्टर) के लिए - १० और ११ मुखी।
सर्जन (डॉक्टर) के लिए - १०, १२ और १४ मुखी।
नर्स-केमिस्ट-कंपाउण्डर के लिए - ३ और ४ मुखी।
दवा-विक्रेता या मेडिकल एजेंट के लिए - १, ७ और १० मुखी।
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के लिए - ३ और १० मुखी।
मेकैनिकल इंजीनियर के लिए - १० और ११ मुखी।
सिविल इंजीनियर के लिए - ८ और १४ मुखी।
इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के लिए - ७ और ११ मुखी।
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के लिए - १४ मुखी और गौरी-शंकर।
कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर के लिए - ९ और १२ मुखी।
पायलट और वायुसेना अधिकारी के लिए - १० और ११ मुखी।
जलयान चालक के लिए - ८ और १२ मुखी।
रेल-बस-कार चालक के लिए - ७ और १० मुखी।
प्रोफेसर एवं अध्यापक के लिए - ४, ६ और १४ मुखी।
गणितज्ञ या गणित के प्रोफेसर के लिए - ३, ४, ७ और ११ मुखी।
इतिहास के प्रोफेसर के लिए - ४, ११ और ७ या १४ मुखी।
भूगोल के प्रोफेसर के लिए - ३, ४ और ११ मुखी।
क्लर्क, टाइपिस्ट, स्टेनोग्रॉफर के लिए - १, ४, ८ और ११ मुखी।
ठेकेदार के लिए - ११, १३ और १४ मुखी।
प्रॉपर्टी डीलर के लिए - ३, ४, १० और १४ मुखी।
दुकानदार के लिए - १०, १३ और १४ मुखी।
मार्केटिंग एवं फायनान्स व्यवसायिओं के लिए - ९, १२ और १४ मुखी।
उद्योगपति के लिए - १२ और १४ मुखी।
संगीतकारों-कवियों के लिए - ९ और १३ मुखी।
लेखक या प्रकाशक के लिए - १, ४, ८ और ११ मुखी।
पुस्तक व्यवसाय से संबंधित एजेंट के लिए - १, ४ और ९ मुखी।
दार्शनिक और विचारक के लिए - ७, ११ और १४ मुखी।
होटल मालिक के लिए - १, १३ और १४ मुखी।
रेस्टोरेंट मालिक के लिए - २, ४, ६ और ११ मुखी।
सिनेमाघर-थियेटर के मालिक या फिल्म-डिस्ट्रीब्यूटर के लिए - १, ४, ६ और ११ मुखी।
सोडा वाटर व्यवसाय के लिए - २, ४ और १२ मुखी।
फैंसी स्टोर, सौन्दर्य-प्रसाधन सामग्री के विक्रेताओं के लिए - ४, ६ और ११ मुखी रुद्राक्ष।
कपड़ा व्यापारी के लिए - २ और ४ मुखी।
बिजली की दुकान-विक्रेता के लिए - १, ३, ९ और ११ मुखी।
रेडियो दुकान-विक्रेता के लिए - १, ९ और ११ मुखी।
लकडी+ या फर्नीचर विक्रेता के लिए - १, ४, ६ और ११ मुखी।
ज्योतिषी के लिए - १, ४, ११ और १४ मुखी रुद्राक्ष ।
पुरोहित के लिए - १, ९ और ११ मुखी।
ज्योतिष तथा र्धामिक कृत्यों से संबंधित व्यवसाय के लिए - १, ४ और ११ मुखी।
जासूस या डिटेक्टिव एंजेसी के लिए - ३, ४, ९, ११ और १४ मुखी।
जीवन में सफलता के लिए - १, ११ और १४ मुखी।
जीवन में उच्चतम सफलता के लिए - १, ११, १४ और २१ मुखी।
 ।Astrologer Gyanchand Bundiwal Nagpur M. 0 8275555557
विषेष : इनके साथ-साथ ५ मुखी रुद्राक्ष भी धारण किया जाना चाहिए।