श्री नवग्रह तांत्रिक मंत्र: श्री नवग्रह देवाय नमः श्री नवग्रह देवाय नमः
https://goo.gl/maps/N9irC7JL1Noar9Kt5।,,,,,,,,,,,Astrologer Gyanchand Bundiwal M. 0 8275555557
सभी प्रकार की पूजा में नवग्रहों की पूजा प्रायः नवग्रहों की शांति के .. ... .महीना भर रोज एक घंटे का पूजन और जप स्वयं करने के ... अच्छे साधक अपनी साधना श्री गणेश और नवग्रह पूजन व साधना से ही आरंभ करते हैं, फिर निश्चिंत होकर आगे चलते जाते हैं। नवग्रह साधना प्रायः दो सप्ताह में पूर्ण हो जाती है। शनि या राहु केतु से आरंभ करें। शनिवार के दिन से फिर रवि, सोम, मंगल, बुध, वृहस्पति, शुक्र और वापस शनिवार को उक्त तीन उग्रग्रहों में से एक या दो की कर लें। एक की करें, तो की ठीक। पुनः शेष ग्रहों का जप दिनानुसार पूर्ण करता जाए। इससे समान रूप से सभी ग्रहों की समान रूप से शांति हो जाती है।
साधना — प्रत्येक ग्रह का सामान्य पंचोपचार पूजन कर इन्हीं मंत्रों का निश्चित संख्यानुसार जप कर लें। माला रूद्राक्ष की, बृहस्पति में चंदन, चंद्रमा में चंदन की, शेष में रूद्राक्ष है। प्रत्येक ग्रह का दिन के अनुसार आधा-आधा जप दो बार (दो सप्ताह) में पूर्ण कर लें। हर बार हवन करता जाए, तो इससे वर्ष भर की ग्रह शांति हो जाती है। अधिक समय तक भी इसका प्रभाव बना रह सकता है। ग्रहों के विषय में इतनी भी चिंता आवश्यक नहीं है, जितना भय दिखाया गया है।
साधना की तैयारी — बाजार से नवग्रहों का एक चित्र तथा नवग्रह पूजन की सामग्री ले आएं, जो कम से कम दो बार पूजन के काम आ सके। प्रथम सप्ताह आधी, फिर दूसरे सप्ताह आधी प्रयोग कर लें।
साधना विधान
केतु साधना — शनिवार के दिन पहली पूजा केतु की करके ११,००० जप कर लें। अगले शनिवार पुनः केतु साधना करके १०,००० जप कर लें। कर सकें, तो दिन भर में सायंकाल तक २१,००० एक ही दिन में पूर्ण करके हवन कर लें या दूसरे शनिवार के साथ हवन करें। तत्पश्चात प्रसाद बांट दें।
राहु — पूर्वोक्त मंत्र से शनिवार के दिन ही राहु की पूजा चित्र पर करके इसका भी पूर्वानुसार जप और हवन कर लें। २१,००० के जप से सारे दोष स्वयं मिट जाते हैं। अधिक प्रपंच में पड़ने से कठिनाई अधिक है। सरल विधान ही ठीक रहता है। तत्पश्चात प्रसाद बांट दें।
शनि — अगले शनिवार को शनिदेव के चित्र पर शनि पदार्थों से पूजा करके शनि का भी जप एक या दो शनिवार में पूर्ण कर हवन कर दें और प्रसाद बांट दें।
सूर्य — रविवार के दिन सूर्यदेव की पूजा करके उनका भी जप एक या दो रविवार में पूरा करके हवन करके प्रसाद बांट दें। पूजा लाल पदार्थों से करें, हवन में थोड़ी सूर्य पूजा सामग्री मिला लें। यही विधि सभी ग्रहों के हवन में करनी होगी।
चंद्र — सोमवार को चंद्रमा की पूजा जप हवन करके एक या दो सेमवार में वही २१,००० जप पूर्ण करके बच्चों में प्रसाद बांट दें। गरीबों में दे दें।
मंगल — मंगलवार के दिन मंगल की पूजा (२१,०००) हवन पूरा करके प्रसाद बांट दें।
बुध — बुधवार के दिन बुधमंत्र से पूजा कर बुध का हवन कर दें। सभी का जप २१,००० ही करना है। यही श्रेष्ठ संख्या है।
गुरु — बृहस्पतिवार को गुरु की पूजा जप हवन करके प्रसाद बांट दें, जप वही २१,०००।
शुक्र — शुक्रवार के दिन शुक्रमंत्र से शुक्र पूजा जप (२१,०००) हवन कर प्रसाद बांट दें, हो गई नवग्रह साधना।
फल - स्वयं किया हुआ जप हवन दूसरे के द्वारा किए हुए से ६ गुना अधिक फल देता है।
साधना मंत्र —,,,रत्न परामर्श के लिए सम्पर्क करे ज्ञानचंद बूंदीवाल M.8275555557,,,
साधना मंत्र संख्या ग्रह दिन
ॐ कें केतवे नमः १७,००० केतु शनि
ॐ शं शनैश्चराय नमः २३,००० शनि शनि
ॐ रां राहवे नमः १८,००० राहु शनि
ॐ ऐं घृणि सूर्याय नमः ७,००० सूर्य रवि
ॐ सों सोमाय नमः ११,००० सोम चंद्र
ॐ अं अंगारकाय नमः १०,००० मंगल मंगल
ॐ बुं बुधाय नमः ८,००० बुध बुध
ॐ बृं बृहस्पतये नमः ११,००० बृहस्पति गुरु
ॐ शुं शुक्राय नमः १६,००० शुक्र शुक्र

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सभी प्रकार की पूजा में नवग्रहों की पूजा प्रायः नवग्रहों की शांति के .. ... .महीना भर रोज एक घंटे का पूजन और जप स्वयं करने के ... अच्छे साधक अपनी साधना श्री गणेश और नवग्रह पूजन व साधना से ही आरंभ करते हैं, फिर निश्चिंत होकर आगे चलते जाते हैं। नवग्रह साधना प्रायः दो सप्ताह में पूर्ण हो जाती है। शनि या राहु केतु से आरंभ करें। शनिवार के दिन से फिर रवि, सोम, मंगल, बुध, वृहस्पति, शुक्र और वापस शनिवार को उक्त तीन उग्रग्रहों में से एक या दो की कर लें। एक की करें, तो की ठीक। पुनः शेष ग्रहों का जप दिनानुसार पूर्ण करता जाए। इससे समान रूप से सभी ग्रहों की समान रूप से शांति हो जाती है।
साधना — प्रत्येक ग्रह का सामान्य पंचोपचार पूजन कर इन्हीं मंत्रों का निश्चित संख्यानुसार जप कर लें। माला रूद्राक्ष की, बृहस्पति में चंदन, चंद्रमा में चंदन की, शेष में रूद्राक्ष है। प्रत्येक ग्रह का दिन के अनुसार आधा-आधा जप दो बार (दो सप्ताह) में पूर्ण कर लें। हर बार हवन करता जाए, तो इससे वर्ष भर की ग्रह शांति हो जाती है। अधिक समय तक भी इसका प्रभाव बना रह सकता है। ग्रहों के विषय में इतनी भी चिंता आवश्यक नहीं है, जितना भय दिखाया गया है।
साधना की तैयारी — बाजार से नवग्रहों का एक चित्र तथा नवग्रह पूजन की सामग्री ले आएं, जो कम से कम दो बार पूजन के काम आ सके। प्रथम सप्ताह आधी, फिर दूसरे सप्ताह आधी प्रयोग कर लें।
साधना विधान
केतु साधना — शनिवार के दिन पहली पूजा केतु की करके ११,००० जप कर लें। अगले शनिवार पुनः केतु साधना करके १०,००० जप कर लें। कर सकें, तो दिन भर में सायंकाल तक २१,००० एक ही दिन में पूर्ण करके हवन कर लें या दूसरे शनिवार के साथ हवन करें। तत्पश्चात प्रसाद बांट दें।
राहु — पूर्वोक्त मंत्र से शनिवार के दिन ही राहु की पूजा चित्र पर करके इसका भी पूर्वानुसार जप और हवन कर लें। २१,००० के जप से सारे दोष स्वयं मिट जाते हैं। अधिक प्रपंच में पड़ने से कठिनाई अधिक है। सरल विधान ही ठीक रहता है। तत्पश्चात प्रसाद बांट दें।
शनि — अगले शनिवार को शनिदेव के चित्र पर शनि पदार्थों से पूजा करके शनि का भी जप एक या दो शनिवार में पूर्ण कर हवन कर दें और प्रसाद बांट दें।
सूर्य — रविवार के दिन सूर्यदेव की पूजा करके उनका भी जप एक या दो रविवार में पूरा करके हवन करके प्रसाद बांट दें। पूजा लाल पदार्थों से करें, हवन में थोड़ी सूर्य पूजा सामग्री मिला लें। यही विधि सभी ग्रहों के हवन में करनी होगी।
चंद्र — सोमवार को चंद्रमा की पूजा जप हवन करके एक या दो सेमवार में वही २१,००० जप पूर्ण करके बच्चों में प्रसाद बांट दें। गरीबों में दे दें।
मंगल — मंगलवार के दिन मंगल की पूजा (२१,०००) हवन पूरा करके प्रसाद बांट दें।
बुध — बुधवार के दिन बुधमंत्र से पूजा कर बुध का हवन कर दें। सभी का जप २१,००० ही करना है। यही श्रेष्ठ संख्या है।
गुरु — बृहस्पतिवार को गुरु की पूजा जप हवन करके प्रसाद बांट दें, जप वही २१,०००।
शुक्र — शुक्रवार के दिन शुक्रमंत्र से शुक्र पूजा जप (२१,०००) हवन कर प्रसाद बांट दें, हो गई नवग्रह साधना।
फल - स्वयं किया हुआ जप हवन दूसरे के द्वारा किए हुए से ६ गुना अधिक फल देता है।
साधना मंत्र —,,,रत्न परामर्श के लिए सम्पर्क करे ज्ञानचंद बूंदीवाल M.8275555557,,,
साधना मंत्र संख्या ग्रह दिन
ॐ कें केतवे नमः १७,००० केतु शनि
ॐ शं शनैश्चराय नमः २३,००० शनि शनि
ॐ रां राहवे नमः १८,००० राहु शनि
ॐ ऐं घृणि सूर्याय नमः ७,००० सूर्य रवि
ॐ सों सोमाय नमः ११,००० सोम चंद्र
ॐ अं अंगारकाय नमः १०,००० मंगल मंगल
ॐ बुं बुधाय नमः ८,००० बुध बुध
ॐ बृं बृहस्पतये नमः ११,००० बृहस्पति गुरु
ॐ शुं शुक्राय नमः १६,००० शुक्र शुक्र

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