नवग्रहों पूजा ,,,पूजा में नवग्रहों की पूजा प्रायः नवग्रहों की शांति के लिए की जाती है। साधक अपनी साधना श्री गणेश और नवग्रह पूजन व साधना से ही आरंभ करते हैं, फिर निश्चिंत होकर आगे चलते जाते हैं। परम्परागत रूप में ज्योतिषीय आधार में नवग्रह माने गये हैं, सात दिनों पर आधारित सात ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति,शुक्र, शनि और दो छाया है | ज्योतिष में ग्रहों की शांति के अनेक सिद्दांत प्रचिलित है | मंत्र - तंत्र - यन्त्र , टोटके , दान - पुन्य , रंग और अनेक प्रकार के कर्मकांडो के माध्यम से नव गृह की शांति की जाती है | सूर्यस्य मन्त्रः - विश्वनाथसारोद्धारे ॐ ह्सौः श्रीं आं ग्रहाधिराजाय आदित्याय स्वाहा॥
चन्द्रस्य मन्त्रः - कालीपटले ॐ श्रीं क्रीं ह्रां चं चन्द्राय नमः॥
भौमस्य मन्त्रः - शारदाटीकायाम् ऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा॥
बुधस्य मन्त्रः - स्वतन्त्रे ॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
जीवस्य मन्त्रः - त्रिपुरातिलके ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रींठः ऐंठः श्रींठः स्वाहा॥
शुक्रस्य मन्त्रः - आगमशिरोमणौ ॐ ऐं जं गं ग्रहेश्वराय शुक्राय नमः॥
शनैश्चरस्य मन्त्रः - आगमलहर्याम् ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा॥
राहोर्मन्त्रः - आगमलहर्याम् ॐ क्रीं क्रीं हूँ हूँ टं टङ्कधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा॥
केतु मन्त्रः - मन्त्रमुक्तावल्याम् ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
इति नवग्रहमन्त्रः सम्पूर्णम्
ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शान्तिकरा भवन्तु ।।
मंत्र का अर्थ
अर्थात् हे ब्रह्मा, विष्णु और शिव, मैं आपको नमस्कार करता/करती हूं। हे त्रिदेव आप सूर्य, चंद्र, मंगल ,बुध गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु सभी ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत कर दो। ये ग्रह मेरे जीवन में शुभ प्रभाव दें
सूर्य ॐ घृणि: सूर्याय नम:।। ॐ ह्रीं हौं सूर्याय नम:।।
चंद्र ॐ सों सोमाय नम:।। ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।।
भौम ॐ अं अंङ्गारकाय नम:।। ॐ हूं श्रीं भौमाय नम:।।
बुध ॐ बुं बुधाय नम:।। ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नम:।।
गुरु ॐ बृं बृहस्पतये नम:।। ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नम:।।
शुक्र ॐ शुं शुक्राय नम:।। ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नम:।।
शनि ॐ शं शनैश्चराय नम:।। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:।।
राहु ॐ रां राहवे नम:।। ॐ ऐं ह्रीं राहवे नम:।।
केतु ॐ कें केतवे नम:।। ॐ ह्रीं ऐं केतवे नम:।।
भौमस्य मन्त्रः - शारदाटीकायाम् ऐं ह्सौः श्रीं द्रां कं ग्रहाधिपतये भौमाय स्वाहा॥
बुधस्य मन्त्रः - स्वतन्त्रे ॐ ह्रां क्रीं टं ग्रहनाथाय बुधाय स्वाहा॥
जीवस्य मन्त्रः - त्रिपुरातिलके ॐ ह्रीं श्रीं ख्रीं ऐं ग्लौं ग्रहाधिपतये बृहस्पतये ब्रींठः ऐंठः श्रींठः स्वाहा॥
शुक्रस्य मन्त्रः - आगमशिरोमणौ ॐ ऐं जं गं ग्रहेश्वराय शुक्राय नमः॥
शनैश्चरस्य मन्त्रः - आगमलहर्याम् ॐ ह्रीं श्रीं ग्रहचक्रवर्तिने शनैश्चराय क्लीं ऐंसः स्वाहा॥
राहोर्मन्त्रः - आगमलहर्याम् ॐ क्रीं क्रीं हूँ हूँ टं टङ्कधारिणे राहवे रं ह्रीं श्रीं भैं स्वाहा॥
केतु मन्त्रः - मन्त्रमुक्तावल्याम् ॐ ह्रीं क्रूं क्रूररूपिणे केतवे ऐं सौः स्वाहा॥
इति नवग्रहमन्त्रः सम्पूर्णम्
ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च ।
गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शान्तिकरा भवन्तु ।।
मंत्र का अर्थ
अर्थात् हे ब्रह्मा, विष्णु और शिव, मैं आपको नमस्कार करता/करती हूं। हे त्रिदेव आप सूर्य, चंद्र, मंगल ,बुध गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु सभी ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत कर दो। ये ग्रह मेरे जीवन में शुभ प्रभाव दें
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ग्रह तांत्रिक- मंत्र बीज- मंत्रसूर्य ॐ घृणि: सूर्याय नम:।। ॐ ह्रीं हौं सूर्याय नम:।।
चंद्र ॐ सों सोमाय नम:।। ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम:।।
भौम ॐ अं अंङ्गारकाय नम:।। ॐ हूं श्रीं भौमाय नम:।।
बुध ॐ बुं बुधाय नम:।। ॐ ऐं श्रीं श्रीं बुधाय नम:।।
गुरु ॐ बृं बृहस्पतये नम:।। ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नम:।।
शुक्र ॐ शुं शुक्राय नम:।। ॐ ह्रीं श्रीं शुक्राय नम:।।
शनि ॐ शं शनैश्चराय नम:।। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:।।
राहु ॐ रां राहवे नम:।। ॐ ऐं ह्रीं राहवे नम:।।
केतु ॐ कें केतवे नम:।। ॐ ह्रीं ऐं केतवे नम:।।

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