Wednesday, 25 May 2016

लाल किताब के सिद्ध टोटके

लाल किताब के सिद्ध टोटके
1. यदि कन्या की शादी में कोई रूकावट आ रही हो तो पूजा वाले 5 नारियल लें ! भगवान शिव की मूर्ती या फोटो के आगे रख कर “ऊं श्रीं वर प्रदाय श्री नामः” मंत्र का पांच माला जाप करें फिर वो पांचों नारियल शिव जी के मंदिर में चढा दें ! विवाह की बाधायें अपने आप दूर होती जांयगी !
2. प्रत्येक सोमवार को कन्या सुबह नहा-धोकर शिवलिंग पर “ऊं सोमेश्वराय नमः” का जाप करते हुए दूध मिले जल को चढाये और वहीं मंदिर में बैठ कर रूद्राक्ष की माला से इसी मंत्र का एक माला जप करे ! विवाह की सम्भावना शीघ्र बनती नज़र आयेगी
5. व्यापार बढाने के लिए :
1. शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के दोनों तरफ बाहर की ओर थोडा सा गेहूं का आटा रख दें ! ध्यान रहे ऐसा करते हुए आपको कोई देखे नही !
2. पूजा घर में अभिमंत्रित श्र्री यंत्र रखें !
3.शुक्र्वार की रात को सवा किलो काले चने भिगो दें ! दूसरे दिन शनिवार को उन्हें सरसों के तेल में बना लें ! उसके तीन हिस्से कर लें ! उसमें से एक हिस्सा घोडे या भैंसे को खिला दें ! दूसरा हिस्सा कुष्ठ रोगी को दे दें और तीसरा हिस्सा अपने सिर से घडी की सूई से उल्टे तरफ तीन बार वार कर किसी चौराहे पर रख दें ! यह प्रयोग 40 दिन तक करें ! कारोबार में लाभ होगा !
6. लगातार बुखार आने पर :
1. यदि किसी को लगातार बुखार आ रहा हो और कोई भी दवा असर न कर रही हो तो आक की जड लेकर उसे किसी कपडे में कस कर बांध लें ! फिर उस कपडे को रोगी के कान से बांध दें ! बुखार उतर जायगा !
2. इतवार या गुरूवार को चीनी, दूध, चावल और पेठा (कद्दू-पेठा, सब्जी बनाने वाला) अपनी इच्छा अनुसार लें और उसको रोगी के सिर पर से वार कर किसी भी धार्मिक स्थान पर, जहां पर लंगर बनता हो, दान कर दें !
3. यदि किसी को टायफाईड हो गया हो तो उसे प्रतिदिन एक नारियल पानी पिलायें ! कुछ ही दिनों में आराम हो जायगा !
7. नौकरी जाने का खतरा हो या ट्रांसफर रूकवाने के लिए :
पांच ग्राम डली वाला सुरमा लें ! उसे किसी वीरान जगह पर गाड दें ! ख्याल रहे कि जिस औजार से आपने जमीन खोदी है उस औजार को वापिस न लायें ! उसे वहीं फेंक दें दूसरी बात जो ध्यान रखने वाली है वो यह है कि सुरमा डली वाला हो और एक ही डली लगभग 5 ग्राम की हो ! एक से ज्यादा डलियां नहीं होनी चाहिए !
8. कारोबार में नुकसान हो रहा हो या कार्यक्षेत्र में झगडा हो रहा हो तो :
यदि उपरोक्त स्थिति का सामना हो तो आप अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर जल प्रवाह कर दें ! अवश्य लाभ होगा !
9. मुकदमें में विजय पाने के लिए :
यदि आपका किसी के साथ मुकदमा चल रहा हो और आप उसमें विजय पाना चाहते हैं तो थोडे से चावल लेकर कोर्ट/कचहरी में जांय और उन चावलों को कचहरी में कहीं पर फेंक दें ! जिस कमरे में आपका मुकदमा चल रहा हो उसके बाहर फेंकें तो ज्यादा अच्छा है ! परंतु याद रहे आपको चावल ले जाते या कोर्ट में फेंकते समय कोई देखे नहीं वरना लाभ नहीं होगा ! यह उपाय आपको बिना किसी को पता लगे करना होगा !
10. धन के ठहराव के लिए :
आप जो भी धन मेहनत से कमाते हैं उससे ज्यादा खर्च हो रहा हो अर्थात घर में धन का ठहराव न हो तो ध्यान रखें को आपके घर में कोई नल लीक न करता हो ! अर्थात पानी टप–टप टपकता न हो ! और आग पर रखा दूध या चाय उबलनी नहीं चाहिये ! वरना आमदनी से ज्यादा खर्च होने की सम्भावना रह्ती है !
11. मानसिक परेशानी दूर करने के लिए :
रोज़ हनुमान जी का पूजन करे व हनुमान चालीसा का पाठ करें ! प्रत्येक शनिवार को शनि को तेल चढायें ! अपनी पहनी हुई एक जोडी चप्पल किसी गरीब को एक बार दान करें !
12. बच्चे के उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु के लिए :
1. एक काला रेशमी डोरा लें ! “ऊं नमोः भगवते वासुदेवाय नमः” का जाप करते हुए उस डोरे में थोडी थोडी दूरी पर सात गांठें लगायें ! उस डोरे को बच्चे के गले या कमर में बांध दें !
2. प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें ! बच्चा दीर्घायु होगा !
13. किसी रोग से ग्रसित होने पर :
सोते समय अपना सिरहाना पूर्व की ओर रखें ! अपने सोने के कमरे में एक कटोरी में सेंधा नमक के कुछ टुकडे रखें ! सेहत ठीक रहेगी !
14. प्रेम विवाह में सफल होने के लिए :
यदि आपको प्रेम विवाह में अडचने आ रही हैं तो :
शुक्ल पक्ष के गुरूवार से शुरू करके विष्णु और लक्ष्मी मां की मूर्ती या फोटो के आगे “ऊं लक्ष्मी नारायणाय नमः” मंत्र का रोज़ तीन माला जाप स्फटिक माला पर करें ! इसे शुक्ल पक्ष के गुरूवार से ही शुरू करें ! तीन महीने तक हर गुरूवार को मंदिर में प्रशाद चढांए और विवाह की सफलता के लिए प्रार्थना करें !
15. नौकर न टिके या परेशान करे तो :
हर मंगलवार को बदाना (मीठी बूंदी) का प्रशाद लेकर मंदिर में चढा कर लडकियों में बांट दें ! ऐसा आप चार मंगलवार करें !
16. बनता काम बिगडता हो, लाभ न हो रहा हो या कोई भी परेशानी हो तो :
हर मंगलवार को हनुमान जी के चरणों में बदाना (मीठी बूंदी) चढा कर उसी प्रशाद को मंदिर के बाहर गरीबों में बांट दें !
17. यदि आपको सही नौकरी मिलने में दिक्कत आ रही हो तो :
1. कुएं में दूध डालें! उस कुएं में पानी होना चहिए !
2. काला कम्बल किसी गरीब को दान दें !
3. 6 मुखी रूद्राक्ष की माला 108 मनकों वाली माला धारण करें जिसमें हर मनके के बाद चांदी के टुकडे पिरोये हों !
18. अगर आपका प्रमोशन नहीं हो रहा तो :
1. गुरूवार को किसी मंदिर में पीली वस्तुये जैसे खाद्य पदार्थ, फल, कपडे इत्यादि का दान करें !
2. हर सुबह नंगे पैर घास पर चलें !
19. पति को वश में करने के लिए :
यह प्रयोग शुक्ल पक्ष में करना चाहिए ! एक पान का पत्ता लें ! उस पर चंदन और केसर का पाऊडर मिला कर रखें ! फिर दुर्गा माता जी की फोटो के सामने बैठ कर दुर्गा स्तुति में से चँडी स्त्रोत का पाठ 43 दिन तक करें ! पाठ करने के बाद चंदन और केसर जो पान के पत्ते पर रखा था, का तिलक अपने माथे पर लगायें ! और फिर तिलक लगा कर पति के सामने जांय ! यदि पति वहां पर न हों तो उनकी फोटो के सामने जांय ! पान का पता रोज़ नया लें जो कि साबुत हो कहीं से कटा फटा न हो ! रोज़ प्रयोग किए गए पान के पत्ते को अलग किसी स्थान पर रखें ! 43 दिन के बाद उन पान के पत्तों को जल प्रवाह कर दें ! शीघ्र समस्या का समाधान होगा
1. आर्थिक समस्या के छुटकारे के लिए :
यदि आप हमेशा आर्थिक समस्या से परेशान हैं तो इसके लिए आप 21 शुक्रवार 9 वर्ष से कम आयु की 5 कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें !
2. घर और कार्यस्थल में धन वर्षा के लिए :
इसके लिए आप अपने घर, दुकान या शोरूम में एक अलंकारिक फव्वारा रखें ! या
एक मछलीघर जिसमें 8 सुनहरी व एक काली मछ्ली हो रखें ! इसको उत्तर या उत्तरपूर्व की ओर रखें ! यदि कोई मछ्ली मर जाय तो उसको निकाल कर नई मछ्ली लाकर उसमें डाल दें !
3. परेशानी से मुक्ति के लिए :
आज कल हर आदमी किसी न किसी कारण से परेशान है ! कारण कोई भी हो आप एक तांबे के पात्र में जल भर कर उसमें थोडा सा लाल चंदन मिला दें ! उस पात्र को सिरहाने रख कर रात को सो जांय ! प्रातः उस जल को तुलसी के पौधे पर चढा दें ! धीरे-धीरे परेशानी दूर होगी !
4. कुंवारी कन्या के विवाह हेतु :

Tuesday, 24 May 2016

नवग्रह के पौधे और उनका फल

नवग्रह के पौधे और उनका फल
सूर्य- आंकड़ा : बौद्धिक प्रगति, स्मृति शक्ति विकास।
चंद्र- पलाश : मानसिक रोगों से मुक्ति।
मंगल- खैर : इसके पूजन से रक्त विकार तथा चर्म रोग ठीक होते हैं। प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।
बुध- आंधी झाड़ा : इसके स्नान से वायव्य बाधा का शमन व मानसिक संतुलन बना रहता है।
गुरु- पारस पीपल : इसके पूजन से ज्ञान वृद्घि तथा भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है।
शुक्र- गूलर : पूजन से पूर्व जन्म के दोषों का नाश होता है।
शनि- शमी : पूजन से धन, बुद्घि, कार्य में प्रगति, मनोवांछित फल की प्राप्ति तथा बाधाएं दूर होती हैं।
राहु- चंदन : पूजन से राहु पीड़ा से मुक्ति तथा सर्प दंश भय समाप्त होता है।
केतु- अश्वगंधा : मानसिक विकलता दूर होती है।


नवग्रह पूजन विधि

नवग्रह पूजन विधि====भगवान शिव के पूजन के साथ नवग्रह पूजन का विशेष महत्व ग्रंथ-पुराणों में वर्णित है। नवग्रह-पूजन के लिए पहले ग्रहों का आह्वान करके उनकी स्थापना की जाती है। बाएँ हाथ में अक्षत लेकर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए दाएँ हाथ से अक्षत अर्पित करते हुए ग्रहों का आह्वान किया जाता है।
नवग्रह पूजन विधि तालिका
बुध==शुक्र===चंद्र==बृहस्पति==सूर्य==मंगल==केतु==यम==राहु
सूर्य : सबसे पहले सूर्य का आह्वान किया जाता है क्योंकि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। रोली से रंगे हुए लाल अक्षत और लाल रंग के पुष्प लेकर निम्न मंत्र से सूर्य का आह्वान करें -
ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च ।
हिरण्येन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्‌ ॥
जपा कुसमसंकाशं काश्यपेयं महाद्युतिम्‌ ।
तमोऽरिं सर्वपापघ्नं सूर्यमावाहयाम्यहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः कलिंगदेशोद्भव कश्यपगोत्र रक्तवर्ण भो सूर्य! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ सूर्याय नमः, श्री सूर्यमावाहयामि स्थापयामि च ।
भगवान शिव के पूजन के साथ नवग्रह पूजन का विशेष महत्व ग्रंथ-पुराणों में वर्णित है। नवग्रह-पूजन के लिए पहले ग्रहों का आह्वान करके उनकी स्थापना की जाती है। बाएँ हाथ में अक्षत लेकर निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए दाएँ हाथ से अक्षत अर्पित करें।
चंद्र : श्वेत अक्षत और पुष्प बाएँ हाथ में लेकर दाएँ हाथ से अक्षत और पुष्प छोड़ते हुए निम्न मंत्र से चंद्र का आह्वान करें-
ॐ इमं देवा असनप्न(गुँ) सुवध्वं महते क्षत्राय
महते ज्येष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रस्येंद्रियाय ।
इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोऽमी
राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणाना(गुँ); राजा ॥
दधिशंखतुषाराभं क्षीरोदार्णवसम्भवम्‌ ।
ज्योत्स्नापतिं निशानाथं सोममावाहयाम्यहम ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः यमुनातीरोद्धव आत्रेय गोत्र शुक्लवर्ण भो सोम! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ सोमाय नमः, सोममावाहयामि, स्थापयामि च ।
मंगल : लाल पुष्प और लाल अक्षत दाएँ हाथ में लेकर बाएँ हाथ से छोड़ते हुए निम्न मंत्र से मंगल देवता का आह्वान करें-
ॐ अग्निर्मूर्धा दिवः कुकुत्पतिः पृथिव्या अयम्‌।
अपा(गुँ)श्रेता(गुँ)सि जिन्वति ॥
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्तेजस्समप्रभम्‌ ।
कुमारं शक्तिहस्तं च भौममावाहयाम्यहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः अवन्तिदेशोद्भव भारद्वाजगोत्र रक्तवर्ण भो भौम! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ भौमाय नमः, भौममावाहयामि स्थापयामि च ।
बुध : पीले व हरे रंग के अक्षत और पुष्प अर्पित करते हुए निम्न मंत्र से बुध देवता का आह्वान करें-
ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स(गुँ)जेथामयं च ।
अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन्‌ विश्वे देवा जयमानश्च सीदत ॥
प्रियंगकलिकाभासं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं बुधमावाहयाम्यहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः मगधदेशोद्भव आत्रेयगोत्र पीतवर्ण भो बुध! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ बुधाय नमः, बुधमावाहयामि, स्थापयामि च ।
बृहस्पति : अष्टदल से अंकित बृहस्पति का आह्वान पीले रंग से रंगे अक्षत और पुष्प अर्पित कर करें-
ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु।
यद्दीदयच्छवसः ऋतप्रजात्‌ तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्‌ ॥
उपयामगृहीतोऽसि बृहस्पतये त्वैष ते योनि बृहस्पतये त्व ।
देवानां च मनीनां च गुरुं काञ्चनसन्निभम्‌ ।
वंदनीयं त्रिलोकानां गुरुमावाहयाम्यंहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः सिन्धुशोद्धव आडिगंरसगोत्र पीतवर्ण भी गुरो! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ बृहस्पतये नमः, बृहस्पतिमावाहयामि स्थापयामि च ।
शुक्र : शुक्र भगवान का आह्वान करने के लिए श्वेत फूल और अक्षत देवता को अर्पित करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें :
ॐ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा व्यपिबत्क्षत्रं पयः सोमं प्रजापतिः ।
ऋतेन सत्यमिन्द्रियं विपान(गुँ) शुक्रमन्धस इंद्रस्येद्रियमिदं पयोऽमृतं मधु ॥
हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्‌ ।
सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवमावाहयाम्यमहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः भोजकटदेशोद्धव भार्गवगोत्र शुक्लवर्ण भो शुक्र! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ शुक्राय नमः, शुक्रमावाहयामि स्थापयामि च ।
शनि : सूर्य पुत्र शनि का आह्वान करने के लिए काले रंग से रंगे अक्षत और काले फूल समर्पित करते हुए निम्न मंत्र का उच्चारण करें :
ॐ शं नो देवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।
शंयोरपि स्रवन्तु नः ।
नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌ ।
छायामार्तण्डसम्भूतं शनिमावाहयाम्यहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः सौराष्ट्रदेशोद्धव कश्यपगोत्र कृष्णवर्ण भो शनैश्चर! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ शनैश्चराय नमः, शनैश्चरमावाहयामि, स्थापयामि च ।
राहु : नवग्रह में काले मगर की आकृति के रूप में राहु की पूजा की जाती है। काले रंगे अक्षत और फूलों को बाएँ हाथ में लेकर दाएँ हाथ से अर्पित करते हुए निम्न मंत्र बोलते हुए राहु का आह्वान करें -
ॐ कया नश्चित्र आ भुवदूती सदावधः सखा ।
कया शचिष्ठया वृता ॥
अर्धकायं महावीर्यं चंद्रादित्यविमर्दनम्‌ ।
सिंहिकागर्भसम्भूतं राहुमावाहयाम्यहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः राठिनपुरोद्धव पैठीनसगोत्र कृष्णवर्ण भो राहो! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ राहवे नमः, राहुमावाहयामि स्थापयामि च ।
केतु : केतु का आह्वान करने के लिए धूमिल अक्षत और फूल लेकर निम्न मंत्र का उच्चारण करें -==ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे ।
समुषद्धिरजायथाः ॥
पलाशधूम्रसगांश तारकाग्रहमस्तकम्‌ ।
रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं केतु मावाहयाम्यहम्‌ ॥
ॐ भूर्भुवः स्वः अंतवेदिसमुद्धव जैमिनिगोत्र धूम्रवर्ण भी केतो! इहागच्छ, इहतिष्ठ
ॐ केतवे नमः, केतुमावाहयामि स्थापयामि च ।
नवग्रह : नवग्रहों के आह्वान और स्थापना के बाद हाथ में अक्षत लेकर निम्न मंत्र उच्चारित करते हुए नवग्रह मंडल में प्रतिष्ठा के लिए अर्पित करें।
ॐ मनो जूर्तिर्ज्षतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमं ततनोत्वरिष्टं यज्ञ(गुँ)सममं दधातु।
विश्वे देवास इह मादयन्तामो3म्प्रतिष्ठा ॥
निम्न मंत्र से नवग्रहों का आह्वान करके उनकी पूजा करें :
अस्मिन नवग्रहमंडले आवाहिताः सूर्यादिनवग्रहा
देवाः सुप्रतिष्ठिता वरदा भवन्तु ।
प्रार्थना==ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसतो बुधश्च गुरुश्च शुक्रः शनि राहुकेतवः सर्वेग्रहाः शांतिकरा भवन्तु ॥
सूर्यः शौर्यमथेन्दुरुच्चपदवीं सन्मंगलं मंगलः सद्बुद्धिं च बुधो गुरुश्च गुरुतां शुक्र सुखं शं शनिः ।
राहुर्बाहुबलं करोतु सततं केतुः कुलस्यो नतिं
नित्यं प्रीतिकरा भवन्तु मम ते सर्वेऽनकूला ग्रहाः ॥


नवग्रह दान देख कर करें ?? वरना हो सकते हैं परेशान

नवग्रह दान देख कर करें ?? वरना हो सकते हैं परेशान
यूं तो दान का विशेष महत्व है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ दान ऐसे होते हैं जो आपको लाभ देने के बजाय हानि देते हैं। जानिए किस व्यक्ति को कौन सा दान नहीं करना चाहिए-
===जो ग्रह जन्म कुंडली में उच्च राशि या अपनी स्वयं की राशि में स्थित हों, (स्वग्रही) उनसे संबंधित वस्तुओं का दान व्यक्ति को कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
==सूर्य मेष राशि में होने पर उच्च तथा सिंह राशि में होने पर अपनी स्वराशि का होता है अत: == लाल या गुलाबी रंग के पदार्थों का दान न करें।
= =गुड़, आटा, गेहूं, तांबा आदि किसी को न दें।
चंद्रमा वृष राशि में उच्च तथा कर्क राशि में स्वगृही होता है। यदि आपकी जन्म कुंडली ऐसी स्थिति में हो तो====दूध, चावल, चांदी, मोती एवं अन्य जलीय पदार्थों का दान कभी नहीं करें।
====माता अथवा मातातुल्य किसी स्त्री का कभी भूल से भी दिल न दुखाएं अन्यथा मानसिक तनाव, अनिद्रा एवं किसी मिथ्या आरोप का भाजन बनना पड़ेगा।
===मंगल मेष या वृश्चिक राशि में हो तो स्वराशि का तथा मकर राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। ऐसी स्थिति में-
=== मसूर की दाल, मिष्ठान्न अथवा अन्य किसी मीठे खाद्य पदार्थ का दान नहीं करना चाहिए।
=== घर में आए किसी मेहमान को कभी सौंफ खाने को न दें अन्यथा वह व्यक्ति कभी किसी अवसर पर आपके खिलाफ ही कड़वे वचनों का प्रयोग करेगा।
===बुध मिथुन राशि में स्वगृही तथा कन्या राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी जन्म पत्रिका में बुध ऐसी स्थिति में है तो-
===हरे रंग के पदार्थ और वस्तुओं का दान नहीं करना चाहिए।
===साबुत मूंग, पेन-पेंसिल, पुस्तकें, मिट्टी का घड़ा, मशरूम आदि का दान न करें अन्यथा सदैव रोजगार और धन-संबंधी समस्याएं बनी रहेंगी।
==बृहस्पति जब धनु या मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा कर्क राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है, तब
=== पीले रंग के पदार्थों का दान वर्जित है।
==== सोना, पीतल, केसर, धार्मिक साहित्य या वस्तुएं आदि का दान नहीं करना चाहिए अन्‍यथा 'घर का जोगी जोगड़ा, आन गांव का सिद्ध' जैसी हालत होने लगेगी अर्थात मान-सम्मान में कमी रहेगी।,,,रत्न परामर्श के लिए सम्पर्क करे ज्ञानचंद बूंदीवाल M.8275555557,,,
===शुक्र जब जन्म पत्रिका में वृष या तुला राशि में हो, स्वराशि तथा मीन राशि में हो तो उच्च भाव का होता है।
===व्यक्ति को श्वेत रंग के सुगंधित पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए अन्यथा व्यक्ति के भौतिक सुखों में न्यूनता पैदा होने लगती है।
== नवीन वस्त्र, फैशनेबल वस्तुएं, कॉस्मेटिक या अन्य सौंदर्यवर्धक सामग्री, सुगंधित द्रव्य, दही, मिश्री, मक्खन, शुद्ध घी, इलायची आदि का दान न करें अन्यथा अकस्मात हानि का सामना करना पड़ता है।
==शनि यदि मकर या कुंभ राशि में हो तो स्वगृही होता है तथा तुला राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है, तब
== काले रंग के पदार्थों का दान न करें।
==लोहा, लकड़ी और फर्नीचर, तेल या तैलीय सामग्री, बिल्डिंग मटेरियल आदि का दान/ त्याग न करें।
==== भैंस अथवा काले रंग की गाय, काला कुत्ता आदि न पालें। 
==
राहु वृष (ब्राह्मण/ वैश्य लग्न में) एवं मिथुन (क्षत्रिय/ शूद्र लग्न) राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है, तब-
===नीले, भूरे रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए।===मोरपंख, नीले वस्त्र, कोयला, जौ अथवा जौ से निर्मित पदार्थ आदि का दान किसी को न करें अन्यथा ऋण का भार चढ़ने लगेगा।
== अन्न का कभी भूल से भी अनादर न करें और न ही भोजन करने के पश्चात थाली में जूठन छोड़ें।
===यदि केतु वृश्चिक (ब्राह्मण/ वैश्य लग्न में) एवं धनु (क्षत्रिय/ शूद्र लग्न में) राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी जन्म पत्रिका में केतु उपरोक्त‍ स्‍थिति में है तो-
=== घर में कभी पक्षी न पालें अन्यथा धन व्यर्थ के कामों में बर्बाद होता रहेगा।
===भूरे, चित्र-विचित्र रंग के वस्त्र, कम्बल, तिल या तिल से निर्मित पदार्थ आदि का दान नहीं करना चाहिए।

नवग्रह ,,9 ,,,ग्रहों के मंत्र और दान

नवग्रह  9 ग्रहों के मंत्र और दान

सूर्य तांत्रिक मंत्र- ह्रां ह्रीं हौं : सूर्याय नम:।एकाक्षरी बीज मंत्र- घृणि: सूर्याय नम:जप संख्या- 7000

दान- माणिक्य, गेहूं, धेनु, कमल, गुड़, ताम्र, लाल कपड़े, लाल पुष्प, सुवर्ण।

चंद्र चंद्र तांत्रिक मंत्र- ' श्रां श्रीं श्रौं : चन्द्रमसे नम:' चंद्र एकाक्षरी मंत्र- सों सोमाय नम: जप संख्या- 11,000

दान- वंशपात्र, तंदुल, कपूर, घी, शंख।

भौम भौम मंत्र- ' क्रां क्रीं क्रौं : भौमाय नम:' भौम एकाक्षरी मंत्र- अंगारकाय नम:

दान- प्रवाह, गेहूं, मसूर, लाल वस्त्र, गुड़, सुवर्ण ताम्र। वृषभ जप संख्या- 1000

बुध मंत्र- ' ब्रां ब्रीं ब्रौं : बुधाय नम:'

बुध का एकाक्षरी मंत्र- ' बु बुधाय नम:' जप संख्या- 9,000

दान- मूंग, हरा वस्त्र, सुवर्ण, कांस्य। गुरु मंत्र- ' ग्रां ग्रीं ग्रौं : गुरवे नम:'

गुरु का एकाक्षरी मंत्र- ' ब्रं बृहस्पतये नम:' जप संख्या- 19,000

दान- अश्व, शर्करा, हल्दी, पीला वस्त्र, पीतधान्य, पुष्पराग, लवण।

शुक्र मंत्र- ' द्रां द्रीं द्रौं : शुक्राय नम:' शुक्र का एकाक्षरी मंत्र- ' शुं शुक्राय नम:' जप संख्या- 16,000

दान- धेनु, हीरा, रौप्य, सुवर्ण, सुगंध, घी।

शनि मंत्र- ' प्रां प्रीं प्रौं : शनये नम:' शनि का एकाक्षरी मंत्र- ' शं शनैश्चराय नम: 'जप संख्या- 23000

दान- तिल, तेल, कुलित्, महिषी, श्याम वस्त्र।

राहु मंत्र- ' भ्रां भ्रीं भ्रों : राहवे नम:'  राहु का एकाक्षरी मंत्र- ' रां राहुवे नम:'  जप संख्या- 18,000

दान- गोमेद, अश्व, कृष्णवस्त्र, कम्बल, तिल, तेल, लोहा, अभ्रक।

केतु का तांत्रिक मंत्र- ' स्रां स्रीं स्रों : केतवे नम:' केतु का एकाक्षरी मंत्र- ' के केतवे नम:' जप संख्या- 17,000

दान- तिल, कंबल, कस्तूरी, शस्त्र, नीम वस्त्र, तेल, कृष्णपुष्प, छाग, लौहपात्र।

मेष : अनुकूल - लाल , प्रतिकूल - चटक हरा और पीला

वृषभ : अनुकूल - नीला , सफ़ेद , प्रतिकूल - चटक पीला और लाल

मिथुन : अनुकूल - हरा, हल्का हरा , प्रतिकूल - लाल और नीला

कर्क : अनुकूल - सफ़ेद , प्रतिकूल - तेज पीला , नीला और ग्रे

सिंह  : अनुकूल - भगवा , नारंगी , प्रतिकूल - नीला , तेज पीला 

कन्या : अनुकूल - साफ़ धुले पत्ते जैसा हरा  , प्रतिकूल - गहरा नीला और लाल 

तुला  : अनुकूल - चटकीला सफ़ेद , गुलाबी , मोती जैसा सफ़ेद  , प्रतिकूल - तेज पीला

वृश्चिक  : अनुकूल - हल्का लाल , मैरून , सिंदूरी लाल  , प्रतिकूल - तेह हरा एवं चटक लाल 

धनु  : अनुकूल - पीला  , प्रतिकूल - सफ़ेद एवं सारे चटक रंग

मकर  : अनुकूल - आसमानी नीला  , प्रतिकूल - हरा , नारंगी 

कुम्भ  : अनुकूल - गाड़ा नीला , बैंगनी , काला  , प्रतिकूल - सफ़ेद एवं हरा 

मीन  : अनुकूल - हल्दी जैसा हलका पीला , प्रतिकूल - गाड़ा भगवा एवं  चटक सफ़ेद

कृपया किसी भी रत्न को धारणकरने से पहले किसी अच्छे ज्योतिष से सलाह जरुर ले